हाईकोर्ट ने एमसीडी के एक कर्मचारी को भ्रष्टाचार के मामले में 28 साल बाद बरी किया है। उस पर आरोप था कि एक घायल गाय को छोड़ने की एवज में उसने 250 रुपये घूस ली थी।
भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद एमसीडी ने कर्मचारी जगन्नाथ को निलंबित कर दिया था और निचली अदालत ने उसे एक साल कैद व जुर्माने की सजा सुनाई थी। निचली अदालत के फैसले को ही जगन्नाथ ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
याची जगन्नाथ 1991 में घूस लेने के आरोप में पकड़ा गया था। भ्रष्टाचार रोकथाम ब्यूरो व सीबीआई की टीम ने उसे घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
निचली अदालत ने 2002 में इस मामले में जगन्नाथ को दोषी करार दिया था। मुंशी जीतराम ने शिकायत दर्ज कराई थी कि जगन्नाथ गाय को छोडने के एवज में घूंस मांग रहा है। जीतराम मुंशी के तौर पर इसी विभाग में काम करता था। एजेंसी ने जगन्नाथ के पास से घूंस के पैसे बरामद किए थे।
हाईकोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए जगन्नाथ को बरी किया। अपील पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि पैसे बरामद को लेकर बताया गया मामला काफी पेचीदा है। कोर्ट से बरी होने के बाद जगन्नाथ का कहना था कि उसे फंसाया गया था। खैर इतने लंबे समय बाद आखिर मुझे न्याय मिल ही गया। इस फैसले से उन्हें उम्मीद है कि अब उन्हें ग्रेच्युटी मिल सकेगी।