सुप्रीम कोर्ट में प्रतिष्ठा दांव पर
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद अहम होगा। यदि कोर्ट मेयर के पक्ष में फैसला देता है तो यह एमसीडी के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। वहीं, अगर एमसीडी अपने पक्ष को सही साबित कर पाती है तो यह मेयर और आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ी राजनीतिक हार होगी। इसका सीधा असर एमसीडी की सत्ता संरचना पर पड़ेगा और स्थायी समिति में भाजपा का कब्जा हो सकता है।
मेयर ने उपराज्यपाल की भूमिका पर उठाए सवाल
मेयर ने आरोप लगाया है कि उपराज्यपाल ने 27 सितंबर को सदन की बैठक बुलाकर न केवल उनकी शक्तियों का अतिक्रमण किया, बल्कि एमसीडी के कामकाज में भी हस्तक्षेप किया। मेयर का दावा है कि इस बैठक का उद्देश्य एमसीडी के स्थायी समिति के चुनाव को नियंत्रित करना था।
भाजपा के दबाव में मेयर चुनाव कराने के लिए तैयार हुई आप
एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष राजा इकबाल सिंह ने दावा किया कि भाजपा के दबाव में आम आदमी पार्टी मेयर चुनाव कराने के लिए तैयार हुई है। दरअसल मेयर चुनाव अप्रैल माह में होना था, मगर आप की मंशा थी कि दलित पार्षद मेयर नहीं बने। इस कारण उसने मेयर चुनाव लगातार टाला।
सिंह ने कहा कि पहले अरविंद केजरीवाल जेल से सरकार चलाने की बात कर रहे थे, लेकिन जेल में रहते हुए भी उन्होंने मेयर की फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए। जब वे जेल से बाहर आए, तब भी आप एक महीने से चुनाव न कराने के बहाने ढूंढ रही थी।
भाजपा ने सदन की पिछली बैठक में दलित पार्षद का हक दिलाने का मुद्दा उठाया और आप की साजिश को उजागर किया। यह मामला राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंच गया। आयोग ने एमसीडी से जवाब मांगा, जिससे अब आप सरकार मेयर चुनाव कराने पर मजबूर हो गई है।