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Municipal Corporation Delhi: सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर खींचतान तेज, बजट संशोधनों ने उजागर किया पावर गेम

Thu, 12 Feb 2026 06:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा विनोद डबास, नई दिल्ली

सार

13 फरवरी को पारित होने वाले बजट से ठीक पहले नेता सदन प्रवेश वाही की ओर से लाए गए संशोधनों ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है।
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एमसीडी मुख्यालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एमसीडी में सत्तारूढ़ भाजपा के वरिष्ठ पार्षदों के बीच अंदरूनी टकराव थम नहीं रहा। 13 फरवरी को पारित होने वाले बजट से ठीक पहले नेता सदन प्रवेश वाही की ओर से लाए गए संशोधनों ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है।

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खासतौर पर स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा के प्रस्तावों में कटौती को राजनीतिक गलियारों में पर कतरने की कोशिश के तौर पर माना जा रहा है। स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने बजट को अंतिम रूप देने के दौरान वर्तमान वित्तीय वर्ष में अध्यक्ष मद की राशि करीब पौने पांच करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने और आगामी वर्ष के लिए इसे 15 करोड़ रुपये तय की थी।

इसके समानांतर, वर्तमान वर्ष में मेयर मद की राशि भी सवा 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12 करोड़ रुपये और अगले वर्ष के लिए 15 करोड़ रुपये री थी, लेकिन नेता सदन प्रवेश वाही ने बजट में संशोधन पेश करते हुए स्थायी समिति अध्यक्ष के मद की आगामी वर्ष के लिए प्रस्तावित 15 करोड़  की राशि को घटाकर 10 करोड़ करने का संशोधन प्रस्तुत किया है। 
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वहीं, मेयर मद के मामले में उन्होंने उल्टा रुख अपनाते हुए वर्तमान वर्ष में 12 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये करने और आगामी वर्ष में भी 15 करोड़ रुपये ही रखने का संशोधन प्रस्तुत किया है। इन संशोधनों ने एमसीडी की राजनीति में हलचल मचा दी है। कहा जा रहा कि यह केवल वित्तीय फेरबदल नहीं, बल्कि शक्ति संतुलन का मामला है। 

स्थायी समिति एमसीडी की सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय इकाई मानी जाती है, जिसके पास बड़े ठेकों, परियोजनाओं और खर्चों को मंजूरी देने की व्यापक शक्तियां होती हैं। ऐसे में अध्यक्ष मद की राशि में कटौती को सीधे तौर पर उनके प्रभाव को सीमित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

भाजपा के भीतर पहले भी वरिष्ठ पार्षदों के बीच मतभेद के संकेत मिलते रहे हैं। वे विभिन्न मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व सार्वजनिक तौर पर एकजुटता का दावा करता रहा है, लेकिन बजट जैसे अहम दस्तावेज में खुले तौर पर संशोधन लाना यह दर्शाता है कि अंदरखाने सब कुछ सामान्य नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक, बजट बैठक से पहले कई दौर की अनौपचारिक चर्चाएं भी हुई हैं, लेकिन यह संशोधन पेश करने पर कोई बातचीत नहीं हुई थी। सबकी निगाहें 13 फरवरी को होने वाली बजट बैठक पर टिकी हैं।

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