विपक्षी दल के विरोध के बीच महज दस मिनट में एमसीडी के सदन में 24 से ज्यादा प्रस्ताव पास हो गए। सोमवार को फिर से सदन की एक और महत्वपूर्ण बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। इस वजह से किसी मुद्दे पर चर्चा नहीं हो पाई।
मेयर डॉ. शैली ओबरॉय सदन की बैठक में करीब 40 मिनट की देरी से पहुंचीं। उनके चेयर पर बैठते ही विपक्षी पार्षदों ने नारेबाजी शुरू का दी। विपक्ष ने खानपुर में लावारिस पशु के हमले में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की। अलीपुर पेंट फैक्ट्री में आग की घटना की जांच जल्द कराने और इस घटना के दोषियों को सजा देने के साथ मेयर के इस्तीफे की मांग भी करते रहे।
नेता विपक्ष राजा इकबाल सिंह ने कहा, भाजपा 15 साल निगम में सत्ता में रही और हर साल संपत्तिकर के लिए आम माफी योजना लाई। इस साल भी यह स्कीम लाई जाए, लेकिन आप को दिल्ली की जनता की परवाह नहीं। सदन में जबरदस्त हंगामे के बीच ही सच्चा पक्ष ने लाए गए विभिन्न प्रस्तावों को पास करा लिया। इसके बाद मेयर ने सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया।
भाजपा पार्षद सदन नहीं चलने देना चाहते- मेयर
मेयर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, सदन में कई महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा के लिए रखे गए थे। लेकिन हमेशा की तरह इस बार भी भाजपा के पार्षदों ने सदन नहीं चलने दिया। इसके बावजूद कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव ऑन टेबल लगाए गए, कई और भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव एजेंडे में शामिल थे, जिन्हें पास किया गया।
निगम का लाखों व्यर्थ में हो रहा खर्च- नेता विपक्ष
नेता विपक्ष ने इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, निगम चुनाव के दौरान आप सरकार 10 गारंटी लेकर आई थी, ये झूठ का पुलिंदा साबित हुआ है। दिल्ली में कूड़े के पहाड़ों और लावारिश पशुओं की समस्या ज्यों की त्यों है। मेयर सदन में विपक्ष के प्रश्नों को नकार देती हैं। आप पार्टी के पार्षद कोई प्रश्न नहीं उठाते। इन्होंने मेयर से सवाल किया कि यदि इनकी मंशा सदन चलाने की नहीं, तो निगम का लाखों रुपया व्यर्थ में क्यों खर्च किया जा रहा।