एमसीडी की 11 तदर्थ समितियों के चुनावों में बृहस्पतिवार को अनुसूचित जातियों से संबंधित समिति के चुनाव के दौरान जबरदस्त हंगामा हुआ। आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने आरोप लगाया कि भाजपा ने बहुमत हासिल करने के लिए समिति की सदस्य संख्या जानबूझकर घटा दी है, जो दलित प्रतिनिधित्व के सीधे उल्लंघन जैसा है। हंगामे और हाथापाई की स्थिति को देखते हुए एमसीडी प्रशासन को यह चुनाव तीसरी बार स्थगित करना पड़ा।
अनुसूचित जाति के मामलों से जुड़ी समिति के अध्यक्ष पद के लिए मतदान की प्रक्रिया आरंभ होते ही आप पार्षदों ने समिति में 35 सदस्यो की संख्या घटाकर 21 कर देने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि भाजपा को बहुमत हासिल करने के लिए यह कदम उठाया गया। इस तरह उसने दलित पार्षदों के अधिकारों का सीधा हनन किया गया है। इस बीच आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने मत पेटी में पानी डाल दिया और मतपत्र छीनने का प्रयास किया। मारपीट जैसी स्थिति उत्पन्न कर दी।
इस कारण कुछ देर के लिए बैठक स्थगित कर दी गई। दोबारा बैठक शुरू होने पर भी आप पार्षदों ने मतदान नहीं होने दिया और एक बार फिर बैठक स्थगित करनी पड़ी। इतना ही नहीं, तीसरी बार भी बैठक शुरू होने पर हंगामा जारी रहा। इस कारण समिति का चुनाव अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इससे पहले बुधवार को भी विशेष समितियों के चुनाव के दौरान भी खेल-कूद समिति के चुनाव में भारी हंगामा हुआ था। वहां भी आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने भाजपा पर मतदान की प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप लगाए थे। नतीजतन, खेल-कूद समिति का चुनाव रद्द कर दिया गया था।
हालांकि, 10 अन्य तदर्थ समितियों और शिक्षा व ग्रामीण विकास में भाजपा ने आम आदमी पार्टी को हराकर जीत दर्ज की है। भाजपा ने इन समितियों में अपने प्रत्याशियों को सफलतापूर्वक निर्वाचित कराया और एमसीडी में अपना संगठनात्मक वर्चस्व और मजबूत किया।
आम आदमी पार्टी दलित विरोधी : भाजपा
नई दिल्ली। एमसीडी अनुसूचित जाति कल्याण एवं उनके कोटे का कार्यान्वयन समिति का चुनाव स्थगित होने के लिए महापौर राजा इकबाल सिंह और नेता सदन प्रवेश वाही ने आप पार्षदों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आप पार्षदों के हंगामे को दलित विरोधी और लोकतंत्र का अपमान करार दिया है।
राजा इकबाल सिंह ने कहा, सुरक्षा कर्मियों से धक्का-मुक्की कर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब ये सत्ता में थे, तब इन्होंने दो वर्षों तक समितियों का गठन नहीं होने दिया। वहीं प्रवेश वाही ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की मानसिकता शुरू से ही दलित विरोधी रही है। इन्होंने अपने कार्यकाल में छह महीने तक दलित पार्षद को मेयर नहीं बनने दिया और अब जब दलितों से जुड़ी समिति के गठन में हिंसा और बाधा के जरिये रोकने का प्रयास किया गया।