एमसीडी चुनाव में टिकट के दावेदार नेताजी की सीट महिला आरक्षित हो गई। अब वो पत्नी का हाथ थामकर प्रदेश दफ्तर या बड़े नेताओं के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। ज्यादातर मामले में पत्नी घरेलू हैं, कुछ पार्टी में किसी प्रकोष्ठ या अगुवा संगठन की सदस्य या पदाधिकारी हैं भी तो सक्रियता कम थी।
अब कांग्रेस या भाजपा में ऐसे नेताओं की अच्छी खासी संख्या प्रदेश अध्यक्ष के दफ्तर पहुंचने के समय दिख रही है क्योंकि यहां अभी टिकट की घोषणा नहीं हुई है। कांग्रेस दफ्तर में मंगलवार शाम और बुधवार दोपहर को प्रदेश अध्यक्ष के आसपास एक बार झलक दिखाने को कई नेता पत्नी हाथ थामे दिखाई दिए।
पार्टी नेताओं का कहना है कि कई जगह महिलाओं में मजबूत दावेदार नहीं हैं तो ऐसे में दिग्गज या इलाके में पहचान रखने वाले नेता की पत्नी को टिकट देने में पार्टी गुरेज नहीं करेगी। वही कुछ महिला पार्षद पति को साथ लेकर भी घूम रही हैं लेकिन यहां टिकट वो खुद के लिए ही मांगती दिखीं।
प्रदेश कांग्रेस दफ्तर में बुधवार को एक महिला पार्षद खुद के टिकट की पैरवी कर रही थी लेकिन वो सीट महिला की नहीं रही। इस पर संबंधित नेता ने महिला पार्षद के पति की तरफ इशारा करके कहा कि इन्हें लड़वा लो तो उसने कहा नहीं, मैं ही लड़ूंगी। पुरुष सीट पर महिला को टिकट देने की मनाही नहीं है।