कर्मचारियों की कमी, कूड़ा प्रबंधन और नालों की सफाई बनी बड़ी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एमसीडी दिल्ली स्वच्छ भारत सर्वेक्षण की राष्ट्रीय रैंकिंग में अभी तक टॉप 50 में स्थान नहीं बना पाई है। वर्ष 2024 की स्वच्छता रैंकिंग में उसको 90वां स्थान मिला था। इसके पीछे स्थायी समस्याओं और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कमी का नतीजा माना जा रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्र सरकार हर साल साफ-सफाई, जनभागीदारी, नवाचार, और कचरा प्रबंधन जैसे मानकों पर नगर निकायों की रैंकिंग करती है। एमसीडी इन चारों मोर्चों पर पिछड़ी है।
क्या हैं एमसीडी की प्रमुख कमियां?
- सफाई कर्मचारियों की भारी कमी : जरूरत के मुताबिक फील्ड स्टाफ नहीं है। कई वार्डों में एक-तिहाई कर्मचारी ही कार्यरत हैं। इससे नियमित सफाई असंभव है।
- कूड़ा प्रबंधन की असफलता : स्रोत पर कचरा छंटाई की व्यवस्था न के बराबर है। अधिकतर कूड़ा लैंडफिल साइटों पर बिना छांटे भेजा जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में डस्टबिन टूटे या गायब हैं, जिससे सड़क किनारे कचरा जमा होता है।
- नालों की समय पर सफाई नहीं : हर साल मानसून से पहले दावे होते हैं कि नाले साफ हो चुके हैं, लेकिन हकीकत में अधिकांश नालों की सफाई कागजों तक सीमित रहती है। इसका नतीजा बारिश के बाद जलभराव के रूप में सामने आता है।
- सार्वजनिक स्थानों और पार्कों की उपेक्षा : प्रमुख बाजारों, पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर स्थायी सफाई व्यवस्था नहीं है। जगह-जगह कूड़े के ढेर और खुले में शौच जैसी समस्याएं बनी रहती हैं।
- प्रदूषण नियंत्रण में लचर व्यवस्था : सड़कों की धूल और निर्माण स्थलों से निकलने वाला कचरा वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। MCD की मैकेनाइज्ड रोड क्लीनिंग मशीनें भी कई क्षेत्रों में अनुपलब्ध हैं।