सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी बेशक पेइंग गेस्ट (पीजी) का सर्वे कर रही है, लेकिन इसके तरीके पर सवाल उठने लगे हैं। निगम के पास दिल्ली में चलने वाले पीजी की कोई पुख्ता और अपडेटेड सूची नहीं है। वह आरडब्ल्यूए और स्थानीय स्तर से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर पीजी की पहचान कर सर्वे कर रहा है। जबकि छात्र बहुल इलाकों का हर घर पीजी में तब्दील हो रखा है।
(नोट: यह आंकड़े अलग-अलग विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों और कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने वाले एक्सपर्ट की राय से निकाले गए हैं।)
पीजी की संख्या बहुत ज्यादा, सर्वे में कम
छात्र ही नहीं, कामकाजी महिलाओं व पुरुषों के लिए दिल्ली में पीजी चल रहे हैं। इनकी संख्या बड़ी है। इसके लिए बिल्डिंग प्लान व फायर एनओसी के साथ एमसीडी से भी पीजी चलाने की अनुमति लेनी होती है। एमसीडी अगर अपने स्तर पर होमवर्क करने के साथ दिल्ली पुलिस और फायर डिपार्टमेंट से डाटा ले ले तो पीजी की संख्या काफी हद तक पता चल सकती है।