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एमसीडी उप-चुनाव परिणाम में छुपे हैं आप और भाजपा के लिए गंभीर संकेत

Tue, 17 May 2016 01:31 PM IST
राकेश भट्ट/अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली नगर निगम के 13 वार्डों में हुए उप-चुनावों में आम आदमी पार्टी को पांच सीटों पर जीत हासिल हुई है, जबकि डेढ़ साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में एक भी सीट जीतने में असमर्थ रही कांग्रेस ने चार सीटें जीत सबको चौंका दिया है।
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गौर करने वाली बात है कि विधानसभा चुनाव में इन 13 वार्डों में से 12 में आम आदमी पार्टी के विधायकों को जीत हासिल हुई थी। आप को उम्मीद थी कि नगर निगम उप चुनावों में पार्टी को कम से कम 10 से 12 सीटों पर जीत हासिल होगी। लेकिन आप को उम्मीद से आधी सीटें भी हासिल नहीं हुई।

पिछले एक साल में सफाई कर्मचारियों की कई बार हुई हड़ताल और दिल्ली की सड़कों पर पसरे कचड़े ने देश ही नहीं दुनिया भर में दिल्ली की किरकिरी कराई। 

इस हड़ताल के लिए आम आदमी पार्टी लगातार भारतीय जनता पार्टी को दोष देती रही। आप का आरोप था कि नगर निगम सहित केंद्र में भाजपा की सरकार है और अगर वो अपने कर्मचारियों के वेतन का इंतजाम नहीं कर सकते तो उन्हें त्यागपत्र दे देना चाहिए।
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केजरीवाल ने तो यहां तक दावा किया कि अगर भाजपा नगर निगम नहीं चला पा रही तो कुछ महीनों के लिए इसे हमारे हवाले कर दें हम बता देंगे कि इसे कैसे चलाया जाता है। इन परिणामों से क्या ये माना जाए कि दिल्ली की जनता को केजरीवाल के इस दावे पर भरोसा नहीं हुआ।

खिसकने लगा है आप का जनाधार
2015 में प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई आम आदमी पार्टी के लिए दिल्ली नगर निगम के ये उप चुनाव सेमीफाइनल के तौर पर माना जा रहा था। आप ने विधानसभा की 70 में से 67 सीटों पर जीत हासिल कर सभी को चौंकाया था। चुनाव में आप को 29.9% बीजेपी को 34.11% और कांग्रेस को 24.87% मत प्राप्त हुए हैं।

जबकि 2014 में हुए आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी लोकसभा में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई थी जिसके बाद किरण बेदी जैसी दिग्गज नौकरशाह के नेतृत्व में भाजपा ने दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसमें अपनी पूरी ताकत झोंक दी।

इसके बावजूद बीजेपी को इस चुनाव में 70 में से केवल तीन सीटें ही मिल सकीं। इसे बीजेपी के गिरते जनाधार का संकेत माना गया। आम आदमी पार्टी के लिए ये उप चुनाव भी ऐसी ही चुनौती थी जिसमें उसे उम्मीद से आधी सीटें मिलना उसके गिरते जनाधार का संकेत माना जा सकता है।

हालांकि, चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद केजरीवाल ने ट्वीट कर आंकड़ों की बाजीगरी करते हुए कहा जिस नगर निगम पर भाजपा-कांग्रेस का कब्जा था उसमें बाहरी पार्टी (आउटसाइडर) के तौर पर चुनाव लड़ने वाली 'आप' को सबसे ज्यादा सीटें देकर दिल्ली के लोगों ने फिर से पार्टी पर विश्वास जताया है जिसके लिए उन्होंने दिल्ली की जनता को धन्यवाद भी दिया।

कांग्रेस को मिला आत्‍‌मविश्वास
बता दें कि 2017 में दिल्ली नगर निगम के चुनाव होने वाले हैं और आम आदमी पार्टी सहित कांग्रेस, भाजपा की निगाहें उसी पर टिकी हैं। ऐसे में इस परिणाम को कांग्रेस के लिए बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।

विधानसभा 2015 के चुनाव में एक भी सीट जीतने में असफल रही कांग्रेस को दिल्ली में मृतप्राय मान कर पूरी तरह से अनदेखा करने की गलती आप और बीजेपी दोनों के लिए भारी पड़ गई।

13 में से चार सीटें जीत कर आप के बाद दूसरे नंबर पर आई कांग्रेस ने भाजपा को पीछे छोड़ दिया। शून्य पर रही कांग्रेस ने ये संकेत भी दिया है कि उसकी अनदेखी भारी पड़ सकती है।

इन परिणामों ने दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन का कद भी बढ़ा दिया है। परिणामों के तुरंत बाद माकन ने इस जीत के लिए राहुल गांधी को श्रेय देते हुए कहा कि सफाई कर्मचारियों के मुश्किल समय में राहुल गांधी उनके साथ खड़े रहे।

भाजपा और आप के लिए गहरे संकेत ले कर आया परिणाम
2017 में होने वाले नगर निगम चुनाव के पूर्व तैयारी के तौर पर देखे जा रहे इस उप चुनाव ने जहां आम आदमी पार्टी को खतरे का संकेत दे दिया है वहीं इससे भाजपा को भी गहरे संकेत मिले हैं।

सभी नगर निगमों पर कब्जा जमाए भाजपा तीसरे नंबर पर आ गई। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे भाजपा को नुकसान भले ही न हुआ हो लेकिन उसे कोई फायदा भी नहीं हुआ है।

एक साल से कम समय में दिल्ली फिर से नगर निगम चुनावों का सामना करेगी। पिछले एक साल में कई बार दिल्ली की सड़कों पर फैला कचरा और बजबजाती नालियों ने भले ही राजनीतिक दलों को प्रभावित न किया हो, लेकिन दिल्ली की जनता इससे त्रस्त है। 

राजनीतिक फायदे के लिए आम जनता की रोजमर्रा की समस्याओं को अनदेखा करना प्रचंड बहुमत से केंद्र में आने वाली भाजपा और 70 में से 67 सीटें जीतने वाली आम आदमी पार्टी के लिए सबक है। देखना दिलचस्प होगा कि अगले साल होने वाले एमसीडी के चुनाव में तीनों प्रमुख पार्टियां क्या सीख लेती हैं।
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