विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे को कोसने वाली आप व कांग्रेस के एमसीडी बजट पर सहमति की भनक मिलने पर भाजपा पार्षदों ने सदन में हंगामा किया, क्योंकि उन्हें अपने प्रस्ताव पास कराने और आप के प्रस्ताव रद्द कराने में हार तय नजर आ रही थी। बताया जा रहा है कि आप और कांग्रेस के बीच विभिन्न प्रस्तावों खासकर कर्मचारियों को नियमित करने और बजट की राशि में बदलाव को लेकर सहमति बन गई थी।
एमसीडी में भाजपा के 117, आप के 112, कांग्रेस के 8 और एक निर्दलीय पार्षद हैं। कांग्रेस व निर्दलीय के समर्थन से आप के पाले में 121 पार्षद आए गए थे, जो भाजपा से चार अधिक थे। ऐसे में बजट के विभिन्न प्रस्तावों पर मतदान की बारी आने पर भाजपा की हार तय थी। इस तरह भाजपा पार्षदों ने बजट पास होने के दौरान मतदान की नौबत पैदा करने से बचने के लिए हंगामा किया।
सूत्रों के अनुसार, आप और कांग्रेस के बीच कर्मचारियों को नियमित करने, सफाई कर्मचारियों को अतिरिक्त सुविधाएं देने, पार्कों व जल निकासी व्यवस्था में सुधार के लिए बजट बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार व शिक्षा क्षेत्र के लिए अधिक राशि आवंटित करने जैसे मुद्दों पर सहमति बन गई थी।
इसके अलावा, कुछ मदों में कटौती करने और स्थानीय जरूरतों के हिसाब से फंड का पुनर्वितरण करने पर भी दोनों दलों में चर्चा हुई थी। उधर, भाजपा को उम्मीद थी कि कांग्रेस तटस्थ रहेगी या उसके पार्षद मतदान में हिस्सा नहीं लेंगे, जिससे भाजपा को लाभ मिल सकता था।
दरअसल, कांग्रेस के पार्षदों ने अभी तक एक बार भी मतदान में हिस्सा नहीं लिया है। इस बीच कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया कि वह कर्मचारियों की भलाई और जनहित से जुड़े प्रस्तावों का समर्थन करेगी। कांग्रेस के इस रुख ने भाजपा की रणनीति को विफल कर दिया और उसकी स्थिति कमजोर पड़ गई।
जब यह साफ हो गया कि मतदान होने पर भाजपा के कई प्रस्ताव खारिज हो सकते हैं, तो भाजपा पार्षदों ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके बावजूद एमसीडी का बजट पास हो गया।