दिल्ली में सरकारी स्कूलों से बच्चे दूर हो रहे हैं। बीते पांच वर्षों में एमसीडी और सरकारी स्कूलों में नामांकन काफी घटा है। एमसीडी में जहां 17 फीसदी की गिरावट हुई है, वहीं सरकारी स्कूलों में यह गिरावट आठ फीसदी है। गैर सरकारी संगठन प्रजा फाउंडेशन की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। लगभग 95 फीसदी आंकड़े संस्था को आरटीआई के माध्यम से मिले हैं, जबकि बाकी आंकड़े उन्होंने स्वयं जुटाएं हैं।
शुक्रवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में प्रजा फाउंडेशन ने स्कूलों में नामांकन की स्थिति को लेकर रिपोर्ट जारी की। जिसके अनुसार, 2013-14 से लेकर 2017-18 तक सरकारी व निगम के स्कूलों में बच्चों की नामांकन दर में चौंकाने वाली गिरावट दर्ज हुई है। संस्था के मुताबिक, गिरावट का कारण शिक्षा की गुणवत्ता के स्तर में कमी है।
फाउंडेशन के निदेशक मिलिंद म्हस्के ने कहा कि 2013-14 से 2017-18 के बीच एमसीडी स्कूलों के नामांकन में 17 फीसदी की गिरावट आश्चर्यजनक है। इसी तरह से सरकारी स्कूलों में पांच वर्षों में आठ फीसदी की गिरावट है। यह आंकड़े आरटीआई व अन्य स्वयं प्रयास से एकत्र किए गए हैं। निगम स्कूलों के हाल में जारी आंकड़ों के अनुसार, निगम में पहली कक्षा के नामांकन में 43 फीसदी गिरावट हुई है। वर्ष 2010-11 में नामांकन 1,69,215 था जो कि वर्ष 2017-18 में घटकर 95,817 रह गया।
आप विधायकों और निगम पार्षदों ने नहीं उठाए मुद्दे
फाउंडेशन ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि मार्च 2017 से जनवरी 2018 तक 22 विधायकों ने तो शिक्षा को लेकर एक भी मुद्दा नहीं उठाया, जबकि निगम में 2017-18 में 272 में से केवल 11 फीसदी पार्षदों ने महज 10 से अधिक मामले उठाए। जबकि 49 पार्षदों ने तो शिक्षा से जुड़ा कोई मुद्दा ही नहीं उठाया।