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Delhi NCR News: एमसीडी पर खतरनाक और रासायनिक कचरा को सुरक्षित तरीके से नष्ट नहीं करने का आरोप

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- सूरज मेहरोत्रा नाम के एक व्यक्ति ने एनजीटी में आवेदन दायर कर एमसीडी पर आरोप लगाया
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- पुराने कीटनाशकों के डिब्बे, रासायनिक पैकिंग और अन्य खतरनाक कचरे को सुरक्षित तरीके से नष्ट नहीं कर रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली में कचरा प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) पर आरोप है कि वह खतरनाक और रासायनिक कचरे को सुरक्षित तरीके से नष्ट नहीं कर रहा। सूरज मेहरोत्रा ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में आवेदन दायर कर एमसीडी पर खतरनाक कचरे के गलत निपटान का आरोप लगाया है। इसमें कहा गया है कि एमसीडी पुराने कीटनाशकों के डिब्बे, रासायनिक पैकिंग और अन्य खतरनाक कचरे को सुरक्षित तरीके से नष्ट नहीं कर रहा है। इससे पर्यावरण पर बुरा असर पड़ रहा है। आवेदक की ओर से प्रस्तुत दस्तावेज में आरोप लगाया है कि ऐसे कचरे के कारण मिट्टी और भूजल दूषित हो रहे हैं, जबकि हवा में जहरीली गैसें भी फैल रही हैं।

यह मामला पहले से अदालत में चल रहा है। पिछली सुनवाई में एनजीटी ने 6 फरवरी 2026 को आवेदक को संबंधित पर्यावरण कानूनों की पूरी जानकारी देने के निर्देश दिए थे। अब आवेदक ने अपने वकीलों के जरिए अतिरिक्त दस्तावेज जमा कर दिए हैं। इसमें एमसीडी पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। दस्तावेजों के अनुसार, एमसीडी ने कई महत्वपूर्ण पर्यावरण कानूनों का पालन नहीं किया है। आरोप है कि कचरे को बिना उचित अनुमति के इकट्ठा किया गया, उसका सुरक्षित परिवहन नहीं किया गया और न ही वैज्ञानिक तरीके से उसका निपटान किया गया।
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बुनियादी नियमों का भी पालन नहीं
आवेदन में कहा गया है कि प्लास्टिक पैकिंग कचरे को अलग करने जैसे बुनियादी नियमों का भी पालन नहीं किया जा रहा है। आवेदक ने एनजीटी से मांग की है कि एमसीडी को तुरंत इस तरह की गतिविधियां रोकने का निर्देश दिया जाए और उस पर भारी पर्यावरणीय जुर्माना लगाया जाए।

दिल्ली में जल प्रदूषण के 4 मुख्य कारण
-सीवेज: यह एक बड़ी समस्या है क्योंकि बिना उपचारित सीवेज नदी में छोड़ा जाता है। कई ट्रीटमेंट प्लांट प्रदूषण नियंत्रण मानकों को पूरा नहीं करते हैं। इसमें साबुन और डिटर्जेंट के घोल शामिल हैं, जो पर्यावरणीय परिस्थितियों के साथ प्रतिक्रिया कर झाग बनाते हैं।
-कचरा निपटान: शहरी और घरेलू कचरा सीधे जल में फेंका जाता है, जिससे नदी प्रदूषित हो जाती है।
-मिट्टी का कटाव: औद्योगिकीकरण और अन्य प्रयोजनों के लिए नदी किनारे के क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई हो रही है। इससे मिट्टी का कटाव होता है और प्राकृतिक जल फिल्टर का संचय होता है, जो जल की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
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-रासायनिक बहाव: कई उद्योगों और कृषि गतिविधियों से उर्वरक, कीटनाशक और अन्य प्रदूषक नदी में पहुंच जाते हैं। साथ ही जैविक प्रदूषक भी झाग के निर्माण में योगदान करते हैं।
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