अदालत के फैसले से खुश हैं परिजन...
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साढे़ 11 साल पहले एक बच्चे का अपहरण और हत्या के मामले में दोषी जीवक नागपाल को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। फैसला सुनाने से पहले कोर्ट ने कहा, दोषी का कृत्य बेहद क्रूर और जघन्य है। ऐसे में उसके साथ नरमी नहीं बरती जा सकती।
दोषी ने मार्च 2009 में रोहिणी इलाके में 11 वर्षीय मनन महाजन का फिरौती के लिए अपहरण कर हत्या कर दी थी और साक्ष्य मिटाने की मंशा से शव नाले में फेंक दिया था। अदालत ने 60 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।
रोहिणी जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिवाजी आनंद ने अपहरण, हत्या, साक्ष्य नष्ट करने तथा धमकी देने की धाराओं में जीवक को 30 सितंबर को दोषी ठहराया था। वारदात के वक्त वह सीए की पढ़ाई कर रहा था। परिवार को आर्थिक तंगी से निकालने के लिए उसने यह साजिश रची थी। जज ने जीवक की सजा पर बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद उसे फांसी की सजा सुनाई।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने उम्रकैद देने और पीड़ित परिवार ने फांसी देने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा, महज 11 साल के मासूम का अपहरण करने के बाद फिरौती के लिए हत्या करने वाले शख्स से नरमी नहीं बरती जा सकती।
पिता बोले, बेटे को मिला इंसाफ
फैसला सुनते ही पूरा परिवार बेहद भावुक हो गया। मनन के पिता राजेश महाजन ने कहा, उनके बेटे को आज इंसाफ मिला है। मैंने न्याय के लिए साढ़े 11 साल लड़ाई लड़ी और आखिर जीत मिली। इस फैसले से संदेश मिला है कि पैसों के लिए कोई अपराधी न बने और न ही किसी ऐसी घटना को अंजाम दे जिससे उसका भी पूरा जीवन बर्बाद हो जाए।