कोरोना वायरस के खतरे के बाद भी निजामुद्दीन मरकज में जमातियों का जमावड़ा लगाने वाले मौलाना साद से पुलिस लगातार कागजी कार्रवाई के जरिए सवालों का जवाब मांग रही है, लेकिन मौलाना मरकज के नाम से सोशल मीडिया पर बने अकाउंट पर खुद को निर्दोष साबित करने में जुटा है।
मौलाना साद शब-ए-बारात से लेकर हर वह चीज मरकज के फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट करा रहा है, जिसमें उसे साजिश के तहत फंसाने की बात कही जा रही है। अलामी अमीर हजरतजी मौलाना साद साहब के नाम से यह अकाउंट चल रहा है। फेसबुक अकाउंट पर मौलाना के समर्थन में सैकड़ों वीडियो व ऑडियो अपलोड कर मरकज की पूरी कहानी बताने का प्रयास कर रहा है।
खास बात यह है कि इस अकाउंट पर लगभग एक जनवरी 2020 से 30 मार्च 2020 तक के सभी पोस्ट हटा दिए गए हैं। वहीं, साल 2018-19 के पोस्टों के माध्यम से भी खुद को पाक-साफ दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है। इस अकाउंट पर समर्थकों से सभी पोस्ट को शेयर करने की भी अपील की जा रही है।
निजामुद्दीन मरकज से निकले जमातियों की वजह से देशभर में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ी है, जबकि क्वारंटीन में रखे जमातियों की करतूतों को इस फेसबुक अकाउंट पर फर्जी बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर जमातियों की रिपोर्ट निगेटिव बताकर उन्हें साजिश का शिकार होने की ऑडियो पोस्ट भी जारी की जा रही हैं। उधर, पुलिस का दावा है कि मौलाना ने अपने खिलाफ सभी सुबूतों को मरकज से नष्ट कर दिया गया है।
एक करोड़ पीएम केयर में देने का दावा
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल किया जा रहा है, जिसमें एक अंग्रेजी अखबार के हवाले से दावा किया जा रहा है कि मौलाना साद ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए बने पीएम रिलीफ फंड में एक करोड़ रुपये का दान दिया है। इस दावे को मार्च महीने का बताया जा रहा है। मरकज के फेसबुक अकाउंट से इस पोस्ट को सभी जमातियों से शेयर करने की भी अपील की जा रही है।