'पानी को रोकना या कहीं और ले जाना आसान नहीं'
जमीयत की दो दिवसीय कार्यसमिति बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में मदनी ने सरकार के सिंधु जल संधि को खत्म करने के फैसले की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'चिनाब, रावी, झेलम, व्यास और सतलुज नदियां हजारों सालों से बह रही हैं। इस पानी को रोकना या कहीं और ले जाना आसान नहीं है।'
आतंकवाद को स्रोत पर रोकने की जरूरत
पाकिस्तान का नाम लिए बिना मदनी ने कहा कि सरकार को आतंकवाद को उसके स्रोत पर रोकना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे हमले न हों। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को सौ प्रतिशत यकीन है कि कश्मीर में सिर्फ हमलावरों के घर ढहाए गए तो यह कार्रवाई उचित है, लेकिन केवल संदेह के आधार पर ऐसी कार्रवाई गलत होगी।
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वक्फ संशोधन अधिनियम पर आपत्ति
मदनी ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम को वक्फ संपत्तियों को हड़पने का प्रयास करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कानून संपत्तियों की रक्षा नहीं, बल्कि उन्हें छीनने का काम करेगा। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया और बताया कि जमीयत ने लाखों लोगों की भागीदारी के साथ तीन रैलियां आयोजित कीं, जो पूरी तरह शांतिपूर्ण रहीं। उन्होंने जोर दिया कि विरोध संवैधानिक अधिकारों के दायरे में होना चाहिए।
अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई और युद्ध की चेतावनी
मदनी ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई को उचित ठहराया, लेकिन कहा कि पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा के बंगाली भाषी लोगों को इसकी आड़ में परेशान नहीं करना चाहिए। पाकिस्तान के साथ संभावित युद्ध पर उन्होंने कहा कि युद्ध कोई समाधान नहीं है, क्योंकि इसके गंभीर आर्थिक परिणाम होंगे।
प्रेम और शांति का संदेश
मदनी ने कहा कि नियम प्रेम पर आधारित होने चाहिए, न कि नफरत पर। उन्होंने अपने जीवन का हवाला देते हुए कहा, 'मैं एक मुसलमान हूं और मैंने अपना पूरा जीवन इस देश में बिताया है। कुछ प्रचार देश के हित में नहीं हैं।' उन्होंने जोर दिया कि जमीयत शांतिप्रिय संगठन है और कानून को अपने हाथ में लेने के खिलाफ है।