गुड़गांव के मास्टर प्लान 2031 से अरावली की हरियाली को खतरा है। इसके तहत गुड़गांव की 33 हजार 872 हेक्टेयर खेतिहर जमीन को आवासीय क्षेत्र में बदल दिया जाएगा।
अरावली की सैंकड़ों एकड़ पहाड़ी भी इस दायरे में आएंगी। करीब दो दशक पहले अरावली एरिया में आवासीय क्षेत्र विकसित करने की शुरूआत हो गई थी।
गुड़गांव जिले में गुड़गांव-फरीदाबाद रोड़ पर ग्वाल पहाड़ी में सबसे पहले बिल्डर एरिया को लाइसेंस दिया गया था। इसके बाद बिल्डरों की सबसे अधिक मांग अरावली हिल्स की पहाड़ियां ही बन गई।
मास्टर प्लान 2031 के तहत काम शुरू हो गया है। सोहना एरिया में बिल्डर कंपनियों ने अरावली पहाड़ियों को काटना भी शुरू कर दिया है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार मास्टर प्लान पूरा होने तक अरावली की पहाड़ियों का बड़ा हिस्सा समतल कर हरियाली गायब कर दी जाएगी।
तिगरा, घाटा, ग्वाल पहाड़ी, सोहना, रिठौज, घामड़ौज, दमदमा, बालियावास सहित अन्य गांवों में प्रोजेक्ट को अनुमति मिल चुकी है। इसमें सबसे अधिक प्रोजेक्ट रिहायशी हैं। इसके अलावा औद्योगिक, कमर्शियल सेक्टर भी विकसित होंगे।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार गुड़गांव के मेवात एरिया में पहले 8 प्रतिशत तक हरियाली थी। जो फिलहाल 6 प्रतिशत ही बची है। मास्टर प्लान पूरा होने के बाद यह 4 प्रतिशत से भी कम हो जाने की आशंका है।