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Master Plan-2047: दिल्ली की गगनचुंबी इमारतों के बीच उड़ेगी एयर टैक्सी, यमुना और नजफगढ़ ड्रेन में चलेंगी बोट्स

Fri, 14 Aug 2026 03:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

डीडीए की योजना में एयर-बेस्ड परिवहन प्रणाली को जगह दी गई है। एयर टैक्सी और स्वचालित एयर पॉड्स जैसे आधुनिक साधनों के लिए जरूरी कानूनी और ढांचागत व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है।
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demo pic - फोटो : ePlane
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विस्तार
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 दिल्ली 2047 तक सिर्फ सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों की राजधानी नहीं होगी, बल्कि आसमान में भी परिवहन का नया रास्ता खुलेगा। गगनचुंबी इमारतों के बीच हवा में टैक्सी चलाने से लेकर पूरी दिल्ली को थ्री-डी नक्शे पर उतारने तक की तैयारी मास्टर प्लान 2047 में दिखाई दे रही है। जमीन की कमी और तेजी से बढ़ती आबादी के बीच दिल्ली के विकास का नया मॉडल ऊंचाई, तकनीक और बेहतर परिवहन के सहारे तैयार करने की योजना है। आबादी के बढ़ते दबाव के बीच अगले दो दशक में करीब 40 लाख नए घरों की जरूरत भी तय की गई है।

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मास्टर प्लान के अनुमान के मुताबिक 2047 तक राजधानी की आबादी करीब 3.2 करोड़ पहुंच सकती है। इतनी बड़ी आबादी की रिहायशी जरूरत पूरी करने के लिए डीडीए ने लैंड पूलिंग, मेट्रो कॉरिडोर के आसपास ट्रांजिट आधारित विकास और पुरानी कॉलोनियों के पुनर्विकास को आवास रणनीति का आधार बनाया है। अकेले लैंड पूलिंग और ट्रांजिट आधारित विकास वाले क्षेत्रों में करीब 30 लाख नए मकान बनाने की क्षमता बताई गई है।

दिल्ली में जमीन सीमित होने के कारण मास्टर प्लान में शहर को चारों दिशाओं में फैलाने के बजाय सघन और नियोजित विकास पर जोर है। बाहरी और बड़े खाली क्षेत्रों को लैंड पूलिंग नीति के तहत विकसित किया जाएगा। वहीं मेट्रो गलियारों के आसपास ट्रांजिट आधारित विकास से ज्यादा लोगों को सार्वजनिक परिवहन के करीब बसाने की योजना है। 
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जहां झुग्गी, वहीं मकान, हटेगा अनाधिकृत का ठप्पा :मास्टर प्लान में झुग्गी बस्तियों के लिए मौके पर ही पुनर्वास पर जोर है। इसके तहत झुग्गीवासियों को उनके मौजूदा सामाजिक परिवेश के भीतर पक्के और सुरक्षित मकान देने की योजना है। इससे विस्थापन कम करने के साथ जीवन स्तर सुधारने का लक्ष्य है। दिल्ली की 1797 अनाधिकृत कॉलोनियों के बुनियादी ढांचे में सुधार का भी खाका तैयार किया गया है। इन क्षेत्रों में सड़क, पार्क और नागरिक सुविधाओं को बेहतर करने के साथ फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस जैसे आपात वाहनों की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा। 

20 साल में 3.2 करोड़ आबादी के लिए 1600 एमजीडी पानी का लक्ष्य
दिल्ली की अनुमानित आबादी वर्ष 2047 तक करीब 3.2 करोड़ पहुंचने की संभावना को देखते हुए मास्टर प्लान-2047 में भविष्य की जल जरूरतों को पूरा करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार की गई है। योजना में राजधानी के लिए करीब 1,600 एमजीडी पेयजल आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए मौजूदा स्रोतों के साथ अंतरराज्यीय जल परियोजनाओं और उपचारित अपशिष्ट जल के दोबारा इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में प्रस्तावित रेणुकाजी, लखवार और किशाऊ जैसी अपस्ट्रीम जल परियोजनाओं के जरिए दिल्ली के लिए अतिरिक्त जल उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।

छोटे और किफायती घरों पर जोर
दिल्ली की करीब 85 फीसदी आबादी निम्न और मध्यम आय वर्ग से जुड़ी है। ऐसे में बड़े मकानों के बजाय किफायती छोटे घरों को बढ़ावा देने की योजना है। 25 से 60 वर्गमीटर कारपेट एरिया वाले घरों को प्रमुखता दी जाएगी। समूह आवास को पसंदीदा प्रारूप बनाया जाएगा। लैंड पूलिंग क्षेत्रों में आवास के साथ रोजगार, बाजार और मनोरंजन की सुविधाओं का संतुलित विकास करने का भी प्रस्ताव है।

बदरपुर-राजघाट की खाली जमीन पर बनेंगे नए सार्वजनिक स्थल
राजधानी में बंद और गैर-कार्यात्मक पावर प्लांटों की जमीन का इस्तेमाल भविष्य की सार्वजनिक और पर्यावरणीय जरूरतों के लिए करने की योजना  बनाई गई है। मास्टर प्लान-2047 में बदरपुर और राजघाट जैसे पुराने थर्मल पावर स्टेशनों की खाली जमीन को अडैप्टिव रीयूज के तहत इको-पार्क, सांस्कृतिक केंद्र और सार्वजनिक सुविधाओं में बदलने का प्रस्ताव है। इन पावर प्लांट परिसरों के दोबारा इस्तेमाल का उद्देश्य खाली पड़ी बड़ी जमीन को नए सिरे से उपयोग में लाना है।

2047 तक पूरे शहर का थ्री-डी डिजिटल मॉडल
पूरी दिल्ली अब थ्री-डी डिजिटल मॉडल यानी डिजिटल ट्विन पर होगी। इससे दिल्ली की इमारतों, सड़कों, ट्रैफिक, जमीन के इस्तेमाल और बुनियादी ढांचे की डिजिटल तस्वीर एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेगा। योजना के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा आधारित निर्णय प्रणाली को शहरी नियोजन का हिस्सा बनाने का प्रस्ताव है। इससे भवनों की ऊंचाई, ट्रैफिक का दबाव, अतिक्रमण, सड़क नेटवर्क और पानी व सीवर जैसी सुविधाओं की क्षमता का विश्लेषण अधिक तेजी से किया जा सकेगा। किसी इलाके में नई इमारत या बड़े विकास कार्य का असर आसपास के ट्रैफिक और बुनियादी ढांचे पर कितना पड़ेगा, इसका आकलन डिजिटल मॉडल के जरिए पहले ही किया जा सकेगा।

  • दूसरी तरफ इसमें स्थानिक निर्णय सहायता प्रणाली यानी एसडीएसएस को भी महत्व दिया गया है। इससे अलग-अलग इलाकों के विकास से जुड़े फैसले लेने में आसानी होगी। शहरी नियोजन अनुमान के बजाय वास्तविक आंकड़ों पर तैयार होगा। इसकी अहम कड़ी सरकारी एजेंसियों के डाटा को एक साझा जीआईएस प्लेटफॉर्म पर लाना है। डीडीए, एमसीडी, दिल्ली जल बोर्ड और मेट्रो से जुड़े आंकड़ों के एकीकरण से सड़क, पानी, सीवर, परिवहन और जमीन के इस्तेमाल की जानकारी एक-दूसरे से जोड़ी जा सकेगी। इसका सीधा असर नक्शा पास कराने और विभिन्न विभागों से एनओसी लेने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

70 सीमावर्ती गांवों में नियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों का रास्ता
दिल्ली के बाहरी और ग्रामीण इलाकों में बढ़ते अनियोजित निर्माण और बदलते भूमि उपयोग को व्यवस्थित करने के लिए मास्टर प्लान-2047 में ग्रीन डेवलपमेंट एरिया (जीडीए) और लो-डेंसिटी रेजिडेंशियल एरिया (एलडीआरए) की अवधारणा को महत्व दिया गया है। 

  • इसके तहत बाहरी दिल्ली के करीब 70 गांवों और फार्महाउस क्षेत्रों में विनियमित व्यावसायिक और संस्थागत गतिविधियों के लिए जगह बनाने का प्रस्ताव है। नजफगढ़, टिकरी कलां, छतरपुर और महरौली जैसे ग्रामीण व सीमावर्ती क्षेत्रों में पिछले वर्षों में आवासीय विस्तार के साथ व्यावसायिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं। जीडीए के तहत जमीन के इस्तेमाल और निर्माण गतिविधियों के लिए स्पष्ट नियम तय किए जाने का प्रस्ताव है। 

द्वारका बनेगा दिल्ली का नया ग्लोबल गेटवे
मास्टर प्लान-2047 में द्वारका को नए वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीति बनाई गई है। चाणक्यपुरी में बढ़ते दबाव को कम करने के लिए द्वारका सेक्टर-24 में करीब 34 हेक्टेयर क्षेत्र में नया डिप्लोमैटिक एन्क्लेव विकसित किया जा रहा है। यहां विभिन्न देशों के दूतावास और राजनयिक कार्यालयों के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इस परियोजना के जरिए दिल्ली के कूटनीतिक ढांचे को पश्चिमी दिल्ली की ओर विस्तार देने की योजना है। द्वारका की भौगोलिक स्थिति इस लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नजदीक है और सड़क व मेट्रो नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।

नरेला, द्वारका और रोहिणी में बनेंगे खेल केंद्र
योजना के तहत राजधानी में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को केवल मौजूदा प्रमुख स्टेडियमों तक सीमित रखने के बजाय बाहरी दिल्ली के नए विकसित क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रस्ताव है। प्लान दिल्ली को भविष्य में राष्ट्रमंडल खेलों या ओलंपिक स्तर की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी के योग्य बनाने की दीर्घकालिक सोच शामिल की गई है। इसके लिए विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं, प्रशिक्षण केंद्रों और खिलाड़ियों के लिए जरूरी सहायक ढांचे का विस्तार किया जाएगा। नरेला, द्वारका और रोहिणी जैसे आउटर सब-सिटी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मानकों के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और ट्रेनिंग अकादमियां विकसित करने का प्रस्ताव है।

पुरानी दिल्ली से हटेंगे भारी गोदाम
पुरानी दिल्ली में बढ़ते व्यावसायिक दबाव को कम करने के लिए मास्टर प्लान-2047 में शाहजहानाबाद समेत प्रमुख विरासत क्षेत्रों के लिए विशेष संरक्षण रणनीति प्रस्तावित की गई है। इसके तहत भारी गोदामों, थोक गतिविधियों और प्रदूषणकारी व्यापारों को चरणबद्ध तरीके से पुरानी दिल्ली से बाहर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है।

शाहजहानाबाद यानी वॉल्ड सिटी के लिए योजना का फोकस विरासत संरक्षण के साथ आधुनिक शहरी सुविधाओं के विकास पर है। चांदनी चौक और आसपास के इलाकों में भारी माल की आवाजाही और गोदामों के कारण होने वाले यातायात दबाव को कम करने के लिए इन गतिविधियों को बाहरी क्षेत्रों में  स्थानांतरित किया जाएगा। 

यमुना और नजफगढ़ ड्रेन में चलेंगी बोट्स, बढ़ेगा पर्यटन
भविष्य में सड़क के ऊपर एयर टैक्सी और स्वचालित एयर पॉड्स दौड़ाने की व्यवस्था विकसित करने की योजना है। वहीं यमुना और नजफगढ़ ड्रेन को बोट्स के लिए जलमार्ग बनाकर पानी के रास्ते आवाजाही और पर्यटन की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। डीडीए की योजना में एयर-बेस्ड परिवहन प्रणाली को जगह दी गई है। एयर टैक्सी और स्वचालित एयर पॉड्स जैसे आधुनिक साधनों के लिए जरूरी कानूनी और ढांचागत व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है। बिजली और हाइड्रोजन आधारित परिवहन को बढ़ावा देकर जीवाश्म ईंधन वाले वाहनों पर निर्भरता घटाने का लक्ष्य है।

एक जगह बदल सकेंगे कई सवारियां : दिल्ली में तीन बड़े मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब विकसित करने की योजना है। आनंद विहार-कड़कड़डूमा, कश्मीरी गेट और निजामुद्दीन-सराय काले खां में बनने वाले इन हब में मेट्रो, रेलवे, अंतरराज्यीय बस सेवा, आरआरटीएस और पैदल-साइकिल परिवहन को जोड़ा जाएगा। इससे यात्रियों को एक ही परिसर में अलग-अलग साधन बदलने की सुविधा मिलेगी।

यमुना-साहिबी में चलेंगे जहाजF
दिल्ली के पुराने जलमार्गों को परिवहन और पर्यटन से जोड़ने की योजना है। यमुना और ऐतिहासिक साहिबी नदी यानी नजफगढ़ ड्रेन को बड़ी बोट्स के लिए जलमार्ग के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। नजफगढ़ ड्रेन में छावला ब्रिज से बसईदारापुर ब्रिज के बीच वाटर फ्रंट और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन विकसित करने के लिए 6.22 करोड़ रुपये की योजना प्रक्रियाधीन है।

279 किमी और बढ़ेगा मेट्रो का दायरा : दिल्ली का मौजूदा मेट्रो नेटवर्क करीब 416 किमी है। इसे भविष्य में करीब 279 किमी और बढ़ाने की योजना है। वहीं दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ जैसे आरआरटीएस नेटवर्क के विस्तार से दिल्ली और आसपास के शहरों के बीच यात्रा का समय कम करने का लक्ष्य है।
पार्किंग में ईवी चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य का प्रस्ताव : बड़े पार्किंग स्थलों में कम से कम पांच फीसदी जगह पर ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिलेगा। मास्टर प्लान में सड़क, मेट्रो, जल और हवाई परिवहन को एक साथ विकसित कर दिल्ली की भविष्य की परिवहन जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
खाली मकान भी आएंगे काम : दिल्ली में करीब 11 फीसदी मकान खाली पड़े हैं। इन्हें भी आवास जरूरत पूरी करने में इस्तेमाल करने की योजना है। डीडीए रेंट-टू-ओन और किराया प्रबंधन मॉडल के जरिए खाली मकानों को किराये के बाजार में लाने पर काम करेगा। 

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