15 मिनट का सफर डेढ़ से ढाई घंटे में हुआ पूरा, नई दिल्ली और मध्य दिल्ली से लेकर चाणक्यपुरी, इंडिया गेट, एम्स और मयूर विहार तक वाहनों की लगीं लंबी कतारें
नई दिल्ली। राजधानी में मंगलवार को इंडिया गठबंधन के संसद से निर्वाचन आयोग तक के मार्च के मद्देनजर लगी सुरक्षा बंदिशों का असर सड़कों पर आम दिल्लीवालों को भुगतना पड़ा। सुरक्षा व्यवस्था के तहत लुटियंस दिल्ली की कई प्रमुख सड़कें बंद कर दी गई थीं। बैरिकेडिंग के कारण एक मार्ग पर रोका गया यातायात दूसरे रास्तों पर पहुंचा और वहां से तीसरे मार्ग पर दबाव बढ़ता गया। देखते ही देखते नई दिल्ली और मध्य दिल्ली से लेकर चाणक्यपुरी, इंडिया गेट, एम्स और मयूर विहार तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
कई जगह स्थिति इतनी खराब रही कि 15 मिनट का सफर पूरा करने में डेढ़ घंटे से अधिक समय लगा। वाहन रेंगते रहे और कई चौराहों पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी खुद सड़क पर उतरकर यातायात संभालते दिखाई दिए। इससे साफ हुआ कि प्रदर्शन की सुरक्षा के साथ यातायात को सामान्य बनाए रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
निर्वाचन आयोग के आसपास सुरक्षा कारणों से संसद मार्ग, अशोक रोड और रफी मार्ग समेत कई रास्तों पर आवाजाही रोकी गई। इसका असर गोल डाकखाना, पटेल चौक, जीपीओ, विंडसर प्लेस, जंतर-मंतर रोड और कनॉट प्लेस तक पहुंचा। इंडिया गेट के आसपास के गोलचक्करों पर भी वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। दक्षिणी दिल्ली की ओर एम्स-सफदरजंग के पास रिंग रोड प्रभावित हुआ, जबकि पुरानी दिल्ली के एसपीएम मार्ग और मयूर विहार के पास दिल्ली-नोएडा कॉरिडोर तक यातायात दबाव पहुंच गया। चाणक्यपुरी में शांतिपथ, एपीजे अब्दुल कलाम रोड, तीन मूर्ति, मदर टेरेसा रोड और खड़क सिंह मार्ग पर भी वाहनों की रफ्तार थमी रही।
बंद रास्तों का दबाव वैकल्पिक मार्गों पर पड़ा
निर्वाचन आयोग की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग के बाद वैकल्पिक मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ता गया। तालकटोरा रोड, गुरुद्वारा रकाबगंज रोड, मदर टेरेसा क्रिसेंट रोड, बाबा खड़क सिंह मार्ग और शेख मुजीबुर रहमान रोड पर भी यातायात प्रभावित रहा। कुंदन लाल सहगल रोड, अशोका रोड और जयसिंह रोड पर चालक बंद रास्तों के बीच निकलने का रास्ता तलाशते रहे।
अस्पताल जाने वालों की भी बढ़ी परेशानी
जाम का असर सिर्फ कामकाजी लोगों तक सीमित नहीं रहा। अस्पताल जाने वाले मरीज और उनके परिजन भी परेशान हुए। आश्रम जा रहे मंजीत सिंह करीब 40 मिनट तक जाम में फंसे रहे। पुलिस ने उन्हें रास्ता बदलकर जाने की सलाह दी। गुरु नानक अस्पताल जा रहीं अनीता देवी को आंखों की जांच के लिए समय पर पहुंचना था, लेकिन जाम के कारण उन्हें देरी हुई। सुरेश, पंकज और सोनिया ने बताया कि अगर उन्हें पहले से सड़क बंद होने और मार्च की जानकारी होती तो वे घर से काफी पहले निकलते। लोगों की शिकायत रही कि अचानक किए गए यातायात प्रतिबंधों की पर्याप्त जानकारी उन्हें समय रहते नहीं मिल सकी।
ढाई घंटे में अस्पताल पहुंचे हर्षित
कार चालक हर्षित का सफर मंगलवार के यातायात संकट की गंभीरता बताता है। वह करीब डेढ़ बजे लीला होटल के पास थे। यशवंत प्लेस गोलचक्कर पहुंचने पर उन्हें चारों तरफ जाम मिला। किसी तरह आगे बढ़े तो अशोका होटल के सामने फिर वाहनों की कतार मिली। इसके बाद शांतिपथ-चाणक्यपुरी गोलचक्कर और 11 मूर्ति होते हुए वह करीब सवा तीन बजे आरएमएल अस्पताल पहुंच सके। हर्षित ने बताया कि जाम की स्थिति देखकर उन्होंने कनॉट प्लेस जाने का कार्यक्रम ही रद्द कर दिया। यानी जिस सफर में सामान्य परिस्थितियों में कुछ मिनट लगते, उसमें घंटों लग गए।
सवाल सुरक्षा व्यवस्था के साथ यातायात प्रबंधन का भी
राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा इंतजाम जरूरी हैं, लेकिन मंगलवार की स्थिति ने यातायात प्रबंधन पर सवाल खड़े किए। सड़कें बंद करने के बाद वैकल्पिक मार्गों पर बढ़ने वाले दबाव को नियंत्रित करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी रही, यह सवाल लोगों के बीच रहा। काम पर जाने वाले कर्मचारी, अस्पताल पहुंचने वाले मरीज, छात्र और जरूरी काम से निकले लोग घंटों जाम में फंसे रहे। लोगों की शिकायत का मूल सवाल यही था कि सुरक्षा व्यवस्था ऐसी क्यों न हो, जिसमें प्रदर्शनकारियों की आवाजाही नियंत्रित करने के साथ आम लोगों के लिए पर्याप्त और सुगम यातायात मार्ग भी खुले रहें।
इन इलाकों में थमी वाहनों की रफ्तार
- संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और रफी मार्ग
- गोल डाकखाना, जीपीओ, पटेल चौक और विंडसर प्लेस
- अशोका रोड और जंतर-मंतर रोड
- इंडिया गेट के आसपास के गोलचक्कर
- एम्स-सफदरजंग के पास रिंग रोड
- पुरानी दिल्ली का एसपीएम मार्ग और मयूर विहार के पास दिल्ली-नोएडा कॉरिडोर
- चाणक्यपुरी का शांतिपथ, एपीजे अब्दुल कलाम रोड, तीन मूर्ति, मदर टेरेसा रोड और खड़क सिंह मार्ग