-पंचानन पाठक स्मृति सप्ताहांत हास्य नाट्य समारोह का शुभारंभ, सैयां भये कोतवाल और टूइयां गांव के लोग का हुआ मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। शनिवार की शाम राजधानी के रंगमंच पर ठहाके भी गूंजे और उन्हीं ठहाकों के बीच सामाजिक विसंगतियों पर तीखे सवाल भी उठे। शनिवार को पंचानन पाठक स्मृति सप्ताहांत हास्य नाट्य समारोह के शुभारंभ हुआ। मंच आप सब का (मास्क) की ओर से आयोजित समारोह के पहले दिन दो हास्य नाटकों सैयां भये कोतवाल और टूइयां गांव के लोग का मंचन हुआ। दोनों प्रस्तुतियों ने अपनी अलग रंगभाषा में दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ सामाजिक संदेश भी छोड़ा।
‘सैयां भये कोतवाल’ ने सत्ता पर किया तीखा व्यंग्य-
समारोह की पहली प्रस्तुति प्रसिद्ध नाटककार बसंत सबनीस के चर्चित राजनीतिक व्यंग्य सैयां भये कोतवाल की रही। पी सुशीला मेहरा के निर्देशन में मंचित इस नाटक में सत्ता, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और पद के दुरुपयोग को हास्य के जरिए सामने रखा गया। कहानी सूर्यापुर के राजा रणधीरा और उसके भ्रष्ट प्रधान के इर्द-गिर्द घूमती है। कोतवाल की मृत्यु के बाद वर्षों से ईमानदारी से सेवा कर रहा हवलदार पदोन्नति की उम्मीद लगाए बैठा है। लेकिन योग्यता और अनुभव को दरकिनार कर प्रधान अपने अयोग्य साले अप्पा साहेब को कोतवाल बना देता है। इसके बाद हवलदार अपने साथी सिपाही और प्रेमिका मैनावती के साथ मिलकर इस व्यवस्था का सामना करने की योजना बनाता है।
संदेश देता टूइयां गांव के लोग
पहली प्रस्तुति के बाद टूइयां गांव के लोग ने माहौल को एक अलग रंग दिया। आलोक शुक्ला द्वारा लिखित, परिकल्पित और निर्देशित इस नाटक में एक ऐसे गांव की कहानी सामने आई, जहां समस्याओं का हल लड़ाई-झगड़े के बजाय बातचीत, हंसी, समझ और आपसी सहयोग से निकाला जाता है। कविता, नीरुपमा वाडेरा, आलोक शुक्ला, टेकचंद, संजय कुमार सिंह, मृदुल कुमार, अभिमन्यु चौधरी, योगेश शर्मा, वागीश शर्मा, जीतेंद्र सिंह, शिब्बू गाजीपुरी, निखिल कुमार, विनय शर्मा, प्रताप सिंह और विजय लक्ष्मी ने विभिन्न भूमिकाओं में अभिनय किया। मंच के पीछे भी पूरी टीम सक्रिय रही। संगीत की जिम्मेदारी शिब्बू गाजीपुरी और टेकचंद ने संभाली, जबकि सेट टेकचंद, प्रकाश व्यवस्था लकी मल्होत्रा और ध्वनि व्यवस्था तुषार चमोला ने संभाली। समारोह 3 अक्टूबर तक प्रत्येक शनिवार और रविवार जारी रहेगा, जिसमें अलग-अलग निर्देशकों के हास्य नाटकों का मंचन किया जाएगा।