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लड़के नहीं उसकी मां से कुंडली मिलेगी तो होगी शादी

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पहले लोग शादी से पहले होने वाले वर-वधू की कुंडली का मिलान कर देखते थे कि इनके कितने गुण मिल रहे हैं, क्या ये एक दूसरे के साथ सुखी रहेंगे।
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पर अब वो दिन लद गए हैं जब लड़के और लड़की की कुंडली का मिलान होता था अब तो लड़की की कुंडली उसकी सास व अन्य घरवालों से भी मिलवाई जाती है।

सास व अन्य घरवालों से कुंडली मिलाने पर लोग तर्क देते हुए कहते हैं कि आज का समय इतना खराब है कि जबतक घरवालों से सही तालमेल न हो नई दुल्हन अपना घर खुशी के साथ नहीं संभाल सकती।

अब लड़के से नहीं ‌म‌िलाते कुंडली

फरीदाबाद के संजय गांधी नगर निवासी लीला देवी ने बेटी की शादी तय होने पर सबसे पहले बेटे की मां से कुंडली मिलान कराई। बेटी और होने वाली सास के ग्रह नक्षत्रों के बेहतर मिलान के बाद ही रिश्ते के लिए ‘हां’ की गई।

जी हां! लीला देवी तो मात्र एक उदाहरण हैं। औद्योगिक नगरी में इन दिनों लड़के से पहले उसकी मां से लड़कियों की कुंडली को मिलाने का चलन तेजी से बढ़ा है। जिससे परिवार में सुख शांति बनी रहे और रिश्ते खुशनुमा गुजरे।

विकास की दौड़ में शामिल फरीदाबाद में आए दिन टूटते घरों और बिगड़ते माहौल ने बेटियों के मां-बाप की चिंता बढ़ा दी है। बेटी के बेहतर कल के लिए मां बाप कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। ऐसे में लोग ग्रह दशा की चाल देखने के बाद ही बेटी के रिश्ते के लिए हां कह रहे हैं।
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क्या कहते हैं एस्ट्रोलॉजर

पंडित सुशील द्विवेदी बताते हैं कि हफ्ते में चार से पांच मामले ऐसे आते हैं जिसमें मां-बाप पहले लड़के की मां से कुंडली मिलवाते हैं। उन्हें ये चिंता बनी रहती है कि परिवार के साथ बेटी को रहना है तो लड़के के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों से भी बेहतर रिश्ते रहें।

वहीं, जाने-माने एस्ट्रोलाजर अशोक सनोरिया का मानना है ‌कि बहू वर्किंग है तो ठीक नहीं तो उसका ज्यादातर समय सास के साथ बितता है। ऐसे में लोग सास से कुंडली मिलवा रहे हैं। कुंडली में दूसरा घर ससुराल का होता है। इसमे गुरू, चंद्रमा और बुध बैठा हो तो बहुत अच्छा होता है। शनि, राहू या केतु इस स्थान पर हो तो घर में लड़ाई झगड़े और तनाव की स्थिति बनी रहती है।

कई बार तो हालात रिश्ते खत्म होने तक पहुंच जाते हैं। अच्छा रिश्ता होता है और कुंडली नहीं मिलती तो लोग उपाय भी कराते हैं। जबकि ज्यादातर मामलों में सास से कुंडली नहीं मिलने पर लोग बेटी के लिए कहीं और रिश्ता तलाशते हैं। फरीदाबाद और दिल्ली एनसीआर में इसका चलन तेजी से बढ़ा है।
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