राजधानी के ग्रामीण इलाकों में पूरा दिन चुनाव के बजाय शादी और पंचायत जैसा माहौल रहा। अधिकतर गांवों में ग्रुप में महिलाएं गीत गाते हुए मतदान केंद्रों पर पहुंचीं।
बुजुर्ग मतदान केंद्रों के पास ग्रुप में बैठकर हुक्का गुड़गुड़ाते हुए मतदान पर नजर बनाए हुए थे। राजधानी के सीमावर्ती झड़ौदा कलां, ढांसा, ईसापुर, काजीपुर, मलिकपुर, मुडेला खुर्द, मुंडेला कलां, बाकरगढ़ उजवा, समसपुर, रावता, गालिबपुर, झुलझुली, घुमनहेड़ा, छावला आदि गांवों में वैसे तो सुबह आठ बजे से मतदान का अच्छा माहौल बन गया, लेकिन दोपहर में मतदान केंद्रों का नजारा बदलना शुरू हो गया।