पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन उनके भाई कलानिधि मारन ने टूजी आवंटन घोटाला मामले से जुड़े एयरसेल-मैक्सिस सौदे से संबंधित मामले में अदालत के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी है। उन्होंने तर्क रखा कि उनके खिलाफ दर्ज मामले में टूजी घोटाले से संबंधित विशेष अदालत में सुनवाई नहीं हो सकती। अदालत ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
पटियाला हाउस स्थित विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी ने सीबीआई को 3 अगस्त तक आवेदन पर जवाब दाखिल करने को कहा है। वहीं, सीबीआई ने मारन बंधुओं की इसी मामले में जमानत आवेदन पर अपना जवाब दाखिल कर दिया। अदालत ने जमानत पर भी सुनवाई 3 अगस्त तय कर दी। दोनों भाईयों ने तर्क रखा कि उनका मामला टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन का नहीं है और अलग मामला होने कारण सुनवाई किसी अन्य अदालत में होनी चाहिए।
अदालत ने हाल ही में सीबीआई द्वारा दायर आरोप पत्र पर संज्ञान लेते हुए मारन बंधुओं और मलयेशिया के उद्योगपति टी आनंदकृष्णन के अलावा आनंदकृष्णन के मैक्सिस समूह के आला अधिकारी आगस्तस राल्फ मार्शल और चार कंपनियों सन डायरेक्ट टीवी प्रालि, मैक्सिस कम्युनिकेशंस, बेरहाद अस्त्रों ऑल एशिया नेटवर्क पीएलसी और साउथ एशिया इंटरटेनमेंट होल्डिंग्स लिमिटेड को समन जारी किए थे।
सुनवाई के दौरान सीबीआई की और से पेश वरिष्ठ सरकारी वकील केके गोयल ने अदालत को बताया कि मलयेशिया, मॉरीशस और ब्रिटेन में रह रहे अन्य आरोपियों को भेजे गए समन अभी तामिल नहीं हुए है। उन्होंने कहा समन राजनीतिक स्तर पर उचित चैनल के जरिये ही तामिल करवाए जा सकते हैं। ऐसे में कम से कम तीन माह का समय प्रदान किया जाए। सीबीआई ने मामले में आरोप पत्र 29 अगस्त 2014 को दाखिल किया था। आरोप पत्र में 151 गवाह बनाए गए है और 655 दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं।
सीबीआई का आरोप है कि दयानिधि मारन ने बतौर मंत्री 2006 में चेन्नई के दूरसंचार कंपनी के प्रवर्तक सी शिवशंकरन को एयरसेल और दो अनुषंगी कंपनियों के शेयर मलेशिया के मैक्सिस समूह को बेचने के लिए मजबूर किया था।