जखीरा फ्लाईओवर, आनंद पर्वत के नीचे बसे एक अस्थाई मकान ने जैसे दुख की चादर ओढ़ ली हो। ये वही घर है जहां 20 वर्षीय मकसूद रहता था। वही मकसूद जो मंगलवार को सफेद बाघ के बाड़े में गिर गया था जिसके बाद बाघ ने उसे मार डाला।
मकसूद के बाड़े में कूदने की वजह अभी तक राज है। इस राज से पर्दा उठाते हुए उसके दादा ताहिर बताते हैं कि इन दिनों बाघों और शेरों के लिए उसका प्यार दीवानगी की हद तक पहुंच चुका था। एक बार जून में यूं ही वह चिड़ियाघर घूमने गया था। इसके बाद से ही वह बाघों के लिए दीवाना सा हो गया था।
वह अक्सर परिवार और अपनी पत्नी से बाघों के बारे में बात करता रहता था। उसका ये प्यार इतना बढ़ गया था कि वह बिना किसी को बताए या झूठ बोलकर भी चिड़ियाघर घूमने चला जाता था। यहां वह घंटों गुजारता था। मकसूद की कुली की नौकरी छूट जाने के बाद चिड़ियाघर में उसका आना-जाना कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था।
नौकरी खोजने का कहकर चला जाता था चिड़ियाघर
मकसूद के दादा उसके बाघ प्रेम के बारे में बताते हुए कहते हैं कि मकसूद की शादी एक साल पहले कोलकाता की फातिमा से हुई थी। मकसूद ने बंगाल टाइगर के कई किस्से सुन रखे थे।
उसने 1995 की वो घटना भी सुन रखी थी, जिसमें एक बाघ ने अलिपुर चिड़ियाघर में दो युवकों को मौत के घाट उतार दिया था। दोनों ही उस बाघ को फूलों की माला पहनाने गए थे।
मकसूद के दोस्त भी बाघों के लिए उसकी दीवानगी को अच्छे से जानते थे। इस बारे में उसके दोस्तों का कहना हैं कि जब भी उसपर ये दीवानापन सवार होता था तो वह दोपहर में भी घर से निकल जाता था। वह चिड़ियाघर पहुंचकर बाघों और शेरों को देखता रहता था। चार महीने पहले उसकी नौकरी छूट जाने के बाद तो उसे बहुत समय मिल जाता था।
मकसूद अक्सर अपनी मां से कहकर जाता था कि वो नौकरी की तलाश में जा रहा है पर वह चिड़ियाघर चला जाता था। अपने जमा किए हुए रुपयों से वह चिड़ियाघर का टिकट खरीदता था।
मां-बाप को साथ लाई मकसूद की मौत
मकसूद के एक दोस्त आदिल ने बताया कि पिछले मंगलवार को भी मकसूद चिड़ियाघर गया था और वापस आकर उसने बच्चों को सफेद बाघ की कहानी सुनाई थी। आदिल ने आगे बताया कि मकसूद ने कक्षा 8 में स्कूल छोड़ दिया था और तब से वह मजदूरी करता था।
मकसूद के रिश्तेदार बताते हैं कि उसकी मौत उसके माता-पिता को फिर से साथ लाई है। वो दोनों पिछले कई सालों से कुछ निजी कारणों से अलग रह रहे थे। मकसूद अपनी मां इशरत के साथ रहता था जो घरों में काम करती है। मकसूद के पिता महफूज अलियास परदेसी रिक्शा खींचने का काम करते हैं।
पास ऐसा कोई नहीं था जिससे वह अपना दुख बता सकें। इस समय उन्हें मकसूद के पिता की सबसे ज्यादा जरूरत महसूस हुई। इसके बाद दोनों ही वहां गए और एक साथ पूरी परिस्थिति का सामना किया।
मकसूद की पत्नी फातिमा अपने मायके में है क्योंकि वह सात महीने के गर्भ से है। मकसूद के दादा ताहिर ने बताया कि फातिमा ने जब टीवी पर अपने पति को बाघ द्वारा मारते हुए देखा तो वो ये सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी।
टीवी पर मंगलवार पूरे दिन और बुधवार को भी बार-बार यह हादसा दोहराया जाता रहा, जिसके बाद फातिमा की तबियत खराब हो गई और कोई भी उसे समझा नहीं पा रहा है। इस खबर को सुनने के बाद फातिमा दिल्ली के लिए निकल चुकी है।
बिना सिम का मोबाइल लिए घूमता था मकसूद
मकसूद की मां इशरत ने बताया कि मकसूद की कोई स्थायी नौकरी नहीं थी। वह कई बार नौकरियां छोड़ चुका था। मकसूद को आरएमएल हॉस्पिटल भी ले जाया गया जहां उसका इलाज चल रहा था। उसकी हालत में कुछ सुधार हो भी रहा था।
अपने सरल और भुलक्कड़ स्वभाव के कारण मकसूद के मालिक उससे नाराज रहते थे। उसने माल ढुलाई का अपना काम इसलिए गंवा दिया क्योंकि वह काम छोड़कर जानवरों का पीछा करने चला गया था। उस नौकरी में मकसूद को 100-150 तक के बीच में कुछ भी मिल जाता था।
मकसूद का आखिरी मालिक, ललित था जिसकी कार्डबोर्ड बनाने की फैक्ट्री है। ललित ने बताया कि मकसूद अक्सर दूसरों का काम करता था और माल छोड़कर चला जाता था, जिसकी वजह से ललित को गुस्सा आ गया और चार महीने पहले उसने मकसूद को नौकरी से निकाल दिया।
मकसूद के पड़ोसी उसे खुशदिल और अपने में रहने वाला बंदा मानते थे क्योंकि वह बहुत कम ही किसी से बात करता था और कानों में इयरफोन लगाकर चलता था। मकसूद के पूर्व सहपाठी और मकसूद को एक स्थानीय फैक्ट्री में काम दिलाने वाले सतीश का कहना है कि मकसूद के मोबाइल में सिम नहीं था।
मोबाइल का इस्तेमाल मकसूद केवल फोटो खींचने और गाने सुनने के लिए करता था। उसके फोन में टाइगर की तस्वीरें भी थीं। मकसूद की लाश उसके परिवार को बुधवार दोपहर में सौंपी गई, जिसके बाद उसे पास के कब्रिस्तान में दफनाया गया।
साभारः टाइम्स ऑफ इंडिया