राजधानी में रविवार सुबह हुई बारिश के बाद आईटीओ के अन्ना नगर में झुग्गियों की जगह बनाए गए करीब दर्जन भर पक्के मकान देखते ही देखते गहरे नाले में समा गए। तेज बारिश और डब्ल्यूएचओ की बिल्डिंग में चल रहे निर्माण कार्य की वजह से अचानक नाले का बहाव काफी तेज हो गया। नाले के किनारों की मिट्टी कट गई। किनारे पर बने देखते ही देखते गहरे पानी में समा गए। गनीमत यह रही कि समय रहते लोग घरों से बाहर निकल गए। हालांकि उन्हें अपना सामान बाहर निकालने का मौका नहीं मिला।
हादसे में दो बाइक, एक कार व कुछ मवेशी पानी में बह गए। पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर वायरल कर दी। वीडियो देखकर ऐसा लगा कि यह दिल्ली की नहीं बल्कि किसी पहाड़ी इलाके की वीडियो है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यमुना में पानी बढ़ने की वजह से नाले के दरवाजों (बैराज) को बंद कर दिया गया था, जिसकी वजह से पानी बढ़ने से यह हादसा हुआ। नाले में पानी का लेवल इतना बढ़ गया कि उसका पानी रिंग रोड पर भी आ गया।
जानकारी के अनुसार आईटीओ डब्ल्यूएचओ के पीछे कई दशक से अन्ना नगर नामक झुग्गी बस्ती है। यहां ज्यादातर लोगों ने झुग्गियों की जगह पक्के मकान बना लिए हैं। झुग्गी बस्ती और डब्ल्यूएचओ की बिल्डिंग के बराबर से बड़ा नाला है। नाला टिकरी बॉर्डर से राजधानी के कई हिस्सों में होते हुए आईटीओ से यमुना में गिरता है। उधर डब्ल्यूएचओ की बिल्डिंग को दोबारा से बनाने का पिछले काफी समय से काम चल रहा है। साइट पर चार मंजिल गहरी बेसमेंट पार्किंग बनाने के लिए गड्ढा खोदा गया है। गड्ढा झुग्गी बस्ती के साथ है।
अन्ना कॉलोनी निवासी पंकज यादव ने बताया कि पानी का लेवल बढ़ने का कारण आगे से नाले का बंद होना था। नाले का पानी ओवरफ्लो होकर रिंग रोड के अलावा डब्ल्यूएचओ की निर्माणाधीन अंडरग्राउंड पार्किंग में घुस गया। नाले के किनारे की मिट्टी का कटाव शुरू हो गया। देखते ही देखते किनारे पर खड़े पेड़ गिर गए। पानी डब्ल्यूएचओ की पार्किंग के लिए बनाए गड्ढे की ओर बहने लगा। मकानों में हलचल शुरू हुई तो लोग फौरन निकलकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे।
पानी का बहाव अचानक तेज होने से किनारे बने मकान नाले में समा गए। हादसे में रेखा, मोहन, विशाल, मनप्रीत, पाला, नंद किशोर, पप्पू, रामू, पूरन, धर्मेंद्र और अन्य के मकान नाले में गिर गए। कई मकानों में दरार आ गई है। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है। प्रशासन की ओर से खाने-पीने और रहने के इंतजाम भी किए जा रहे हैं। इधर जिन लोगों के मकान बह गए उनका रोते-रोते बुरा हाल है।