‘यह कैसा इंसाफ है कि पैठ रखने वाले कैदियों को घर का खाना और जब दिल करे घरवालों से मुलाकात और हमारे लिए तमाम बंदिशें...’।
यह खुलासा तिहाड़ जेल के कैदियों की ओर से लिखे गए पत्र से हुआ है। पत्र में अपने साथ हो रहे अन्याय को लेकर कैदियों ने आवाज उठाई है।
अपने पत्र में कैदियों ने जेल की महानिदेशक विमला मेहरा से इंसाफ की गुहार लगाई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि दिल्ली हाईकोर्ट के ऑर्डर के बाद भी फोन कॉल कराने की सुविधा से उन्हें वंचित रखा जा रहा है। जबकि सभी कैदियों के लिए जेल में इसकी सुविधा है।
अमर उजाला को भी भेजे पत्र में कैदी संजय (काल्पनिक नाम) ने यह जानकारी दी। लेकिन तिहाड़ जेल प्रशासन इससे इंकार कर रहा है। जबकि तिहाड़ जेल के हाई सिक्योरिटी वार्ड में बंद कैदियों की इसी भेदभाव को लेकर शुरू की गई भूख हड़ताल समाप्त हो गई है।
तिहाड़ जेल के प्रवक्ता सुनील गुप्ता ने कैदियों के आरोप व पत्र को पूरी तरह से गलत बताते हुए कहा कि मुलाकात के दौरान घर से खाना लाने पर पाबंदी है। जेल में सभी कैदियों के लिए एक ही नियम है और किसी को छूट नहीं है।