एक तरफ सरकार की सख्ती और दूसरी तरफ लापता हुए किसानों के परिवार वालों का दबाव, किसान संगठनों को इस वक्त ऐसी कई तरह की चुनौतियों से गुजरना पड़ रहा है। गणतंत्र दिवस की टैक्टर परेड में लापता हुए ज्यादातर किसानों का अभी तक पता नहीं चल सका है। ऐसे में लापता हुए लोगों की पूछताछ करने उनके घर वाले दिल्ली पहुंचने लगे हैं। उनका किसान संगठनों पर दबाव है कि कैसे भी हो, हमारे लोगों को खोज कर लाएं। इससे किसान संगठनों की दिक्कतें और बढ़ गई हैं।
ऑल इंडिया किसान फेडरेशन के अध्यक्ष प्रेम सिंह भंगू ने अमर उजाला को बताया कि जो लोग जेल के अंदर हैं और जो किसान लापता हैं उन्हें खोजने के लिए संयुक्त मोर्चा ने एक लीगल कमेटी भी बनाई है। हमें जानकारी मिली है अब तक 115 किसान तिहाड़ जेल में हैं। इन्हें जेल से कैसे बाहर निकाला जाए, इसकी कोशिशें चल रही हैं। संगठन की तरफ से दिल्ली सरकार को 29 लापता किसानों की फोटो सहित सूची भी दे दी गई है।
भंगू ने बताया कि सबसे ज्यादा लोग सिंघु बार्डर से लापता हैं। इसके बाद गॉजीपुर बॉर्डर से। रोज हमें करीब 15 से 20 परिवार के फोन आ रहे हैं कि हमारे लोग ट्रैक्टर परेड से अब तक घरों को नहीं लौटे हैं। हमने दिल्ली सरकार से मांग है कि जो लोग जेल में हैं उनमें से अधिकांश लोगों को चोटें भी आई हैं। उनके लिए सरकार एक मेडिकल बोर्ड बनाकर उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराए। इसके अलावा किसानों को जरूरी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं। दोनों ही मांगों पर दिल्ली सरकार राजी हो गई है। 26 जनवरी की घटना पर हमने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से न्यायिक जांच की मांग भी की है।
किसान संगठनों ने कहा है कि लापता लोगों को खोजने के लिए आईटी की टीम लगी हुई है, जो लापता लोगों के परिजनों से संपर्क में हैं। परिवार के लोग लापता हुए लोगों के फोटो, पता और मोबाइल नंबर के साथ टीम के पास पहुंच रहे हैं। पहले टीम फेसबुक और सोशल मीडिया के जरिए इन्हें खोजने की अपील कर रही है। वहीं कुछ वॉलंटियर्स ट्रैक्टर परेड के मार्ग पर आने वाले पुलिस थाने और लोगों से पूछताछ कर रही है। इसके अलावा सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर जत्थों में रह रहे लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।
किसान संगठनों से जुड़े कुछ नेताओं ने अमर उजाला को बताया कि संगठनों के अधिकांश वरिष्ठ नेता अब लोगों को खोजने में जुटे हुए हैं। ऐसे में आंदोलन पर भी असर पड़ गया है। पहले ही लोग अपने घरों को लौट रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ जो लोग आंदोलन में हैं वह भी अब इसमें खास रूचि नहीं दिखा रहे हैं। संगठन लगातार पंजाब और हरियाणा के किसानों को दिल्ली आने की अपील कर रहा है।