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Air Pollution: कठोर नियमों से दुनिया के कई देशों ने प्रदूषण पर पाया काबू, चुनौती अब दिल्ली-एनसीआर के सामने

Sun, 30 Nov 2025 05:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

यूरोप में जर्मनी, फिनलैंड और स्वीडन वायु प्रबंधन के सफल मॉडल हैं। जर्मनी में ग्रीन इंडस्ट्री ट्रांजिशन के तहत भारी उद्योगों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और वाहनों में उत्सर्जन मानकों के कड़े पालन के लिए बाध्य किया गया है। फिनलैंड और स्वीडन में लकड़ी और कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध है, साथ ही शहरों में धूल रोकथाम व कचरा प्रबंधन के लिए लाइव ट्रैकिंग सिस्टम और स्पॉट-फाइन प्रभावी भूमिका निभाते हैं।
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Delhi Pollution - फोटो : ANI
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विस्तार
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दिल्ली-एनसीआर और सिंधु-गंगा के मैदानी इलाके इन दिनों जानलेवा वायु प्रदूषण की गिरफ्त में हैं। लेकिन दुनिया में कई ऐसे देश रहे हैं जिन्होंने बिल्कुल इसी तरह के दमघोंटू संकट का सामना किया और नीति-निर्माताओं की वैज्ञानिक व कठोर कदमों से हालात बदल दिए। अब यही चुनौती दिल्ली-एनसीआर के लिए हैं जो शहरवासियों को दमघोंटू और जहरीली हवा से निजात दिलाए। 

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अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के पैनल की ओर से तैयार नेशनल अर्बन क्लीन एयर स्ट्रैटेजी स्टडी रिपोर्ट के अनुसार, लंदन में 1952 के ग्रेट स्मॉग के बाद व्यापक क्लीन एयर प्लान लागू किया गया था। इस स्मॉग ने लगभग 12,000 लोगों की जान ले ली थी। इसके बाद लागू क्लीन एयर एक्ट–1956 के तहत कोयले से चलने वाले घरेलू बॉयलर और उद्योगों पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए। नतीजतन 1970 के दशक तक लंदन में पीएम2.5 और सल्फर डाइऑक्साइड का स्तर लगभग 70% तक घट गया।

सिंगापुर ने ‘शून्य-सहनशीलता नीति’ और पॉल्यूटेड-पेयर प्रिंसिपल अपनाया। दक्षिण-पूर्व एशिया में जंगल की आग से उठे धुएँ ने हैज संकट को जन्म दिया था। इसके जवाब में सिंगापुर ने अत्यधिक प्रदूषण वाले दिनों में स्कूलों और उद्योगों को स्वचालित रूप से बंद करने का कठोर नियम लागू किया। इससे बच्चों और बुजुर्गों पर प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों में उल्लेखनीय कमी आई और शहर दुनिया के सबसे स्वच्छ महानगरों में शामिल हो गया।
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दुनिया में कई और देश ऐसे हैं, जिन्होंने कठोर पर्यावरणीय कानून और अनुशासित शहरी नीति अपनाकर वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाया। जापान ने 1970 के दशक के औद्योगिक प्रदूषण संकट के बाद जीरो-टॉलरेंस एयर पॉल्यूशन कंट्रोल कोड लागू किया। दक्षिण कोरिया में एयर कर्टेलमेंट प्रोटोकॉल लागू है, जिसके तहत एक्यूआई बढ़ने पर उद्योग लो-एमिशन मोड में चले जाते हैं।

यूरोप में जर्मनी, फिनलैंड और स्वीडन वायु प्रबंधन के सफल मॉडल हैं। जर्मनी में ग्रीन इंडस्ट्री ट्रांजिशन के तहत भारी उद्योगों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और वाहनों में उत्सर्जन मानकों के कड़े पालन के लिए बाध्य किया गया है। फिनलैंड और स्वीडन में लकड़ी और कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध है, साथ ही शहरों में धूल रोकथाम व कचरा प्रबंधन के लिए लाइव ट्रैकिंग सिस्टम और स्पॉट-फाइन प्रभावी भूमिका निभाते हैं।

ऐसे पाया दमघोंटू हवा पर काबू

  • लंदन (यूके): 1952 के ग्रेट स्मॉग के बाद क्लीन एयर एक्ट–1956 लागू, कोयला-आधारित ईंधन आैर उद्योगों पर रोक; 1970 तक प्रदूषण स्तर 70% घटा।
  • सिंगापुर: ‘शून्य-सहनशीलता नीति’, अत्यधिक प्रदूषण वाले दिनों में स्वचालित स्कूल और उद्योग बंद; बच्चों व बुजुर्गों में स्वास्थ्य जोखिम घटे।
  • जापान: औद्योगिक प्रदूषण संकट के बाद जीरो-टॉलरेंस एयर पॉल्यूशन कंट्रोल कोड लागू; उद्योगों व वाहनों के उत्सर्जन पर कड़ी निगरानी।
  • दक्षिण कोरिया: एयर कर्टेलमेंट प्रोटोकॉल—एक्यूआई बढ़ते ही उद्योग लो-एमिशन मोड में चले जाते हैं।
  • जर्मनी: ग्रीन इंडस्ट्री ट्रांजिशन से उद्योगों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और वाहनों पर कड़े उत्सर्जन मानक लागू।
  • फिनलैंड व स्वीडन: लकड़ी/कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध; धूल रोकथाम व कचरा प्रबंधन के लिए लाइव-ट्रैकिंग सिस्टम और त्वरित फाइन।

लॉस एंजिलिस : स्मॉग कैपिटल से साफ शहर
1960-70 के दशक में लॉस एंजिलिस दुनिया में सबसे प्रदूषित वायुमंडलीय क्षेत्र था। इससे निपटने के लिए सरकार ने बहु-स्तरीय रणनीति अपनाई। व्हीकल एमीशन स्टैंडर्ड्स कठोर किए। कैटलिटिक कन्वर्टर अपनाने को अनिवार्य किया गया। परिणाम स्वरूप 10 वर्षों के अंदर वायु प्रदूषण में धीरे-धीरे भारी गिरावट आई। 20 से 25 वर्षों में लॉस एंजिलिस में स्काईलाइंस फिर से साफ दिखने लगीं और ग्राउंड-लेवल ओजोन प्रदूषण 80% से अधिक गिर गया। 

बीजिंग का एयर-पोकैलिप्स और 10-वर्षीय नेशनल एक्शन प्लान
2013 में बीजिंग का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) कई दिनों 900 के ऊपर था, जिसे अंतरराष्ट्रीय वायु गुणवत्ता संस्थाओं और मीडिया ने एयर-पोकैलिप्स नाम दिया। सरकार ने टेन-ईयर नेशनल क्लीन एयर एक्शन प्लान लागू किया। नतीजा- 2013 से 2023 के बीच बीजिंग में पीएम2.5 लगभग 55% घटा और कई बार एक्यूआई 100 से नीचे आने लगा जो दस वर्ष पहले असंभव माना जाता था।

केंद्र और राज्य सरकारों को उठाने होंगे कड़े कदम 
बीजिंग विश्वविद्यालय के पर्यावरण नीतिवेत्ता लियू झियांग का कहना है जब सरकार कठोर पर्यावरणीय नीति लागू कर मौलिक ईंधन-मॉडल बदलने के लिए तैयार होती है, तभी प्रदूषण-नियंत्रण सफल होता है। केवल केमिकल ब्रेकडाउन तकनीक पर्याप्त नहीं है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को मिलकर इस संबंध में कड़े कदम उठाने होंगे, अन्यथा आने वाले 5 से 10 वर्षों में यह क्षेत्र रहने योग्य नहीं रहेगा।

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दिल्ली-एनसीआर के 80 फीसदी घरों में किसी न किसी सदस्य पर जहरीली हवा का असर

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के बीच जहरीली होती हवा से 80 प्रतिशत घरों में कम से कम एक व्यक्ति बीमार या परेशान है। 40 प्रतिशत घरों में चार या इससे ज्यादा लोग प्रदूषण से प्रभावित हुए हैं। यह डाटा हाल ही लोकल सर्कल्स की ओर से किए गए सर्वे में सामने आया है। सोशल प्लेटफार्म के जरिये सर्वे के लिए जाने वाली इस एजेंसी ने दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद से 53,000 से ज्यादा प्रतिक्रियाएं लीं। इनमें 61 पुरुष और 39% महिलाओं ने अपनी राय दी। 

सर्वे में लोगों से पूछा गया कि उनके घर के कितने सदस्य हाल के चार हफ्तों में खराब हवा की वजह से परेशान हुए। इस सवाल का जवाब देने वाले 18,253 लोगों में से 36 फीसदी ने बताया कि उनके घर में चार या उससे ज्यादा लोग बीमार पड़े। 21 फीसदी ने कहा कि दो से तीन लोग प्रभावित हुए और 21 फीसदी घरों में एक सदस्य को स्वास्थ्य समस्याएं हुईं। दीपावली के बाद से दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग की परत छाई हुई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक ज्यादातर खराब से बहुत खराब श्रेणी में रही है और कई दिनों में यह गंभीर स्तर तक पहुंच गई है। प्रदूषण के इस बढ़ते असर से लोगों की सांस, आंखों और गले से जुड़ी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।

तेज बयार से राजधानी के प्रदूषण में आया कुछ सुधार
राजधानी में हवा की तेज गति से वायु प्रदूषण में कुछ कमी आई है। शनिवार सुबह की शुरुआत धुंध और हल्के कोहरे के बीच आसमान में स्मॉग की हल्की चादर भी दिखाई दी। कम दृश्यता के बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 305 दर्ज किया गया जो यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है। इसमें शुक्रवार की तुलना में 64 सूचकांक की गिरावट दर्ज की गई। एनसीआर में नोएडा की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही। यहां एक्यूआई 310 दर्ज किया गया। ग्रेटर नोएडा में 288, गाजियाबाद में 299 और गुरुग्राम में 262 एक्यूआई दर्ज किया गया। फरीदाबाद की हवा सबसे साफ रही। 
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