इसके अलावा इन घायलों में अधिकतर ऐसे हैं, जो गोलियों और बम-धमाकों की चोटों के साथ-साथ बुरी तरह जख्मी हो गए थे। कुछ के तो पैर तक डॉक्टरों को काटने पड़े हैं। कुछ अब भी मानसिक तौर से भी पीड़ित हैं।
इनके इलाज करने वाले डॉक्टरों के मुताबिक, ये सभी पोस्ट-वॉर साइक्लोजिकल डिसओर्डर से ग्रस्त हैं। यही वजह है कि इन सभी घायलों की ऊपरी घाव भरने के साथ साथ इन सभी की साइकिलोजिक्ल काउंसलिंग भी की जा रही है।
कुछ महत्वपूर्ण जानकारी
-तीन सालों से यमन में बने हुए हैं युद्ध के हालात
-बेहतर इलाज के लिए यूएई जैसे देश इलाज के लिए भारत भेज रहे हैं
-गृह युद्ध के रूप में 2015 से शुरू हुआ था यमन में युद्ध
-अल-हुथी नाम के विद्रोही संगठन ने सरकार का तख्ता पलट कर राजधानी साना पर कब्जा किया था
-यूएई व सऊदी अरब ने यमन का साथ देकर अल-हुथी के खिलाफ जंग छेड़ दी
-ईरान ने हुथी संगठन का समर्थन कर युद्ध को बढ़ावा दिया
यूएई सरकार के प्रवक्ता जेसर सालेर ने कहा कि 74 लोग यमन से आए हैं। इनमें 53 मरीज हैं और बाकी तीमरदार हैं। युद्ध के कारण उन्हें कई तरह की समस्याएं है। ये सभी लोग सुबह उठाने पर चौंककर उठ जाते हैं, थोड़ी सी भी तेज आवाज से डर जाते हैं। धीरे-धीरे सब ठीक हो रहा है।