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मनोज एनकाउंटर : खत्म हो चुका था मनोज की पिस्टल का लाईसेंस

Tue, 19 May 2015 06:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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राजेंद्र नगर, दिल्ली के सागर रत्ना रेस्टारेंट में एनकाउंटर में मारे गए जालसाज मनोज वशिष्ठ पिस्टल रखता था। उसने पिस्टल का लाइसेंस मरेठ, उत्तर प्रदेश से ले रखा था।
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मगर उसकी पिस्टल का लाइसेंस बहुत पहले ही खत्म हो गया था। खास बात ये है कि उसकी पिस्टल का लाइसेंस सिर्फ उत्तर प्रदेश का है। वह किसी दूसरे राज्य में पिस्टल को नहीं ले जा सकता था। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस बात की जांच की जा रही है कि मनोज के खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज होने के बावजूद उसे पिस्टल का लाइसेंस कैसे मिल गया है।

ऐसे में मेरठ लाईसेंस अथॉरिटी कठधरे में खड़ी होती दिखाई दे रही है। दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (स्पेशल सेल) एसएन श्रीवास्तव ने बताया कि मनोज वशिष्ठ के पास से 7.65 बोर का पिस्टल का मिला है।
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मनोज का यह आर्म लाइसेंस मेरठ अथॉरिटी से बना हुआ था। उसकी पिस्टल का लाइसेंस 30 अप्रैल, 2014 को खत्म हो गया था।

30 अप्रैल को खत्म हो चुका था पिस्टल का लाइसेंस

उसने वर्ष 2008 में लाइसेंस लिया था और 2011 में खत्म हो गया था। इसकेबाद उसने 2011 में पिस्टल का लाइसेंस रिन्यू कराया था। आखिरी बार पिस्टल का लाइसेंस 30 अप्रैल, 2014 में खत्म हो गया था।

जांच में ये भी पता लगा कि उसने लाईसेंस को रिन्यू कराने केलिए कोई आवेदन भी नहीं दिया था। पुलिस के अनुसार पिस्टल का लाइसेंस यूपी का है तो वह इस पिस्टल को यूपी से बाहर नहीं ले जा सकता, जबकि वह इस पिस्टल को दिल्ली से बाहर लेकर घूम रहा था।

इस कारण पुलिस ने जो मामला दर्ज किया है उसमें मनोज वशिष्ट के खिलाफ आर्म्स एक्ट (अवैध हथियार) की भी धारा लगाई है। विशेष पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने बताया कि मनोज के बारे में स्पेशल सेल को कुछ दिन पहले सूचना मिली थी। इसके बाद स्पेशल सेल की टीम इसे पकड़ने के लिए इसके पीछे लग गई थी।

मनोज समर्थकों ने की पुलिस के खिलाफ नारेबाजी

लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के सुचेता कृपलानी अस्पताल में मनोज वशिष्ठ के शव के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हुई और उसके समर्थकों का हूजुम पोस्टमार्टम घर के पास जमा होने लगा।

बागपत से आए सैकड़ों समर्थक दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे और एनकाउंटर को फर्जी बता रहे थे। समर्थकों की संख्या और मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। बागपत से आए समर्थक पोस्टमार्टम घर के गेट के सामने पुलिस वाले के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।

बागपत से काफी संख्या में महिला समर्थक भी पहुंची थीं। सभी समर्थक एक सुर में इस एनकाउंटर को फर्जी बता रहे थे और बार-बार यही कह रहे थे कि पुलिस वालों ने  सिर में गोली क्यों मार दी? यदि गोली मारनी ही थी तो मनोज पुलिस की गिरफ्त में था हाथ या पैर में गोली मारनी चाहिए थी।

समर्थकों का आरोप था कि पुलिस ने जानबूझकर पूरी तैयारी के साथ मनोज वशिष्ठ का फर्जी एनकाउंटर किया है। बागपत से आए समर्थक शैलेश ने कहा कि मनोज वशिष्ठ के खिलाफ ऐसा कोई आपराधिक मामला नहीं था कि उनका एनकाउंटर कर दिया जाए।

धोखाधड़ी के मुछ मामले जरुर थे लेकिन ज्यादातार मामलों में दूसरी पार्टी से समझौता हो चुका था। यही नहीं समर्थक बार-बार यह भी कह रहे थे कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के पास तो कोई केस भी नहीं था फिर क्यों मारा।
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मामले पर पुलिस है सतर्क

समर्थकों की संख्या और मामला राजनीतिक होने की वजह से काफी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। अस्पताल के मुख्य द्वार से लेकर पोस्टमार्टम घर तक महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। दिल्ली पुलिस के अलावा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को भी तैनात किया गया था।

किसी भी हंगामे से निपटने के लिए पुलिस की ओर से आंसू गैस के गोले छोड़ने की व्यवस्था भी की गई थी। पुलिस की ओर से भीड़ की वीडियोग्राफी की जा रही थी। सादी वर्दी में भी जगह-जगह दिल्ली पुलिस के जवान तैनात थे और लोग क्या बातचीत कर रहे हैं इस पर कड़ी नजर बना रखी थी।

अस्पताल में स्पेशल सेल की टीम के कुछ कर्मी भी मौजूद रहे। पुलिस को जानकारी मिली की समर्थक शव को जंतर-मंतर अथवा दिल्ली में किसी नेता के घर पर ले जाकर हंगामा और धरना-प्रदर्शन कर सकते हैं।

इसलिए दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। वरिष्ठ अधिकारियों को भी इस बात की सूचना दी गई कि समर्थक शव को जंतर-मंतर ले जाने की योजना बना रहे हैं।

सूत्रों की मानें तो समर्थकों के इसी योजना की वजह से पोस्टमार्टम की कार्यवाही में देरी की गई ताकि देर हो जाए और समर्थकों का जोश धीरे-धीरे कम हो जाए और वे अस्पताल से लौट जाएं।
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