डॉ. मनमोहन सिंह देश के ऐसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री बन गए हैं, जिनका अंतिम संस्कार राजधानी के निगम बोध घाट पर हुआ। यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले देश के कई पूर्व प्रधानमंत्रियों का अंतिम संस्कार राजघाट इलाके में हुआ था और वहां उनकी स्मृतियों को संजोने के लिए समाधियां बनाई गईं।
डॉ. मनमोहन सिंह से पहले जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, चौ. चरण सिंह, राजीव गांधी, चंद्रशेखर, आईके गुजराल और अटल बिहारी वाजपेयी का अंतिम संस्कार राजघाट इलाके में शांति वन, विजय घाट, शक्ति स्थल, किसान घाट, वीर भूमि और स्मृति स्थल पर हुआ था। इन सभी नेताओं की समाधियां राष्ट्रीय स्मारकों के रूप में देखी जाती हैं। वहीं, वीपी सिंह, पीवी नरसिम्हा राव और मोरारजी देसाई का अंतिम संस्कार उनके गृह राज्यों में किया गया था। ऐसे में डॉ. मनमोहन सिंह का निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार होना एक अलग परंपरा की शुरुआत जैसा प्रतीत होता है।
इसके अलावा राजघाट इलाके में पूर्व उपप्रधानमंत्री चौ. देवीलाल का संघर्ष स्थल और कांग्रेस नेता संजय सिंह का भी अंतिम संस्कार किया गया था। यहां उनकी समाधि बनी हुई है। जबकि राजघाट के सामने पूर्व उपप्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम का अंतिम संस्कार नहीं हुआ था, लेकिन उनकी याद में यहां स्मारक बना रखा है।
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए राजधानी के लोग और कांग्रेस कार्यकर्ता भावनाओं से भरे माहौल में जगह-जगह एकत्रित हुए। उनकी सादगी, ईमानदारी और देश के प्रति उनके अतुलनीय योगदान को याद करते हुए लोग गमगीन माहौल में उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। इसी तरह कांग्रेस मुख्यालय के समक्ष भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं व लोगों का जमावड़ा रहा।
डॉ. मनमोहन सिंह के पार्थिव शरीर को जब 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय लाया गया तो वहां पहले से ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद थे। उनके हाथों में फूल, बैनर और पोस्टर थे, जिन पर डॉ. मनमोहन सिंह की तस्वीरें और उनकी प्रशंसा के नारे लिखे हुए थे। उन्होंने ‘डॉ. मनमोहन सिंह अमर रहें’ और ‘भारत के सच्चे सपूत को सलाम’ जैसे नारों के साथ उनकी अंतिम यात्रा को यादगार बनाया। उनकी सादगी और निस्वार्थ सेवा को याद करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ता ने कहा कि डॉ. साहब ने हमेशा देश के बारे में सोचा। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।
डॉ. मनमोहन सिंह का पार्थिव शरीर मुख्यालय से निगम बोध घाट तक ले जाया गया। इस दौरान इंडिया गेट, आईटीओ और राजघाट जैसे मुख्य मार्गों पर उनके अंतिम दर्शनों के लिए लोग खड़े नजर आए। हालांकि, पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए आम जनता और कार्यकर्ताओं को शव यात्रा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी। लोगों को यह बात खल रही थी कि वे अपने प्रिय नेता को श्रद्धांजलि देने और उनकी अंतिम यात्रा का हिस्सा बनने से वंचित रह गए। लेकिन फिर भी, रास्ते के किनारे खड़े रहकर उन्होंने अपने तरीके से श्रद्धा व्यक्त की। उनकी अंतिम यात्रा भले ही पुलिस घेरे में रही, लेकिन उनके प्रति लोगों की श्रद्धा और सम्मान सड़कों और दिलों में स्पष्ट दिखाई दिया।
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के अंतिम संस्कार और समाधि के लिए राजघाट परिसर में जगह को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर निशाना साधा है। शनिवार को आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह खबर सुनकर मैं स्तब्ध हूं कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार निगम बोध घाट पर किया गया। इससे पहले भारत के सभी प्रधानमंत्रियों का अंतिम संस्कार राजघाट पर किया जाता था।
उन्होंने कहा कि सिख समाज से आने वाले, पूरी दुनिया में ख्याति प्राप्त, 10 वर्ष भारत के प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह के अंतिम संस्कार और समाधि के लिए केंद्र सरकार 1000 गज जमीन भी न दे सकी। आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि अभी तक देश के करीब सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों का अंतिम संस्कार राजघाट में ही हुआ है। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के साथ यह भेदभाव भाजपा की सोच को दिखाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहता हूं कि भारत के एक महान अर्थशास्त्री, जिनकी पूरी दुनिया में कद्र है। भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने अपनी जिंदगी के दस वर्ष इस देश को आगे बढ़ाने के लिए लगाए। डॉ. सिंह सिख समाज से आने वाले भारत के एकमात्र प्रधानमंत्री हैं। ऐसे में उनके साथ सौतेला बर्ताव कहां तक न्यायोचित है।
इस देश के 144 करोड़ लोग जो हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था रखते हैं, जो डॉ. मनमोहन सिंह के किए गए कार्यों की सराहना करते हैं, सरकार के इस रवैये से उन्हें भी तकलीफ हुई होगी।
मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह खबर सुनकर मैं स्तब्ध हूं कि देश के दस साल तक प्रधानमंत्री रहे मनमोहन जिनकी आर्थिक नीतियां दुनियाभर के विश्वविद्यालयों में पढ़ी और पढ़ाई जाती हैं। जिन्होंने देश को आर्थिक मंदी से बचाया। एक सिख समुदाय से आने वाले प्रधानमंत्री का दिल्ली के निगम बोध घाट में अंतिम संस्कार हुआ।