कांग्रेस विरोधी जमीन पर दिल्ली में अपनी सियासी फसल लहलहाने वाली आम आदमी पार्टी (आप) को इस वक्त कांग्रेस ही सहारे की लाठी नजर आ रही है। यही वजह है कि आप कांग्रेस से गठबंधन की मनाही करने के साथ ही समझौते का संकेत भी देती रही है। पार्टी के दो वरिष्ठ नेता सांसद संजय सिंह व दिल्ली प्रदेश संयोजक गोपाल राय ने पिछले दो दिनों में कांग्रेस से गठबंधन के दरवाजे बंद होने का दावा किया था। लेकिन शनिवार को तीसरे वरिष्ठ नेता व दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक बार फिर बातचीत का ग्रीन सिग्नल दिया है।
दरअसल, ना-नुकुर करने के साथ आप की कांग्रेस से समझौते में दिलचस्पी ठोस वजहें हैं। विधानसभा चुनाव में बेशक आप को 67 सीटें मिली थीं और वोट शेयर भी 54 फीसदी से ज्यादा था, लेकिन पार्टी रणनीतिकार मान रहे हैं कि लोकसभा चुनाव की तुलना सीधे तौर पर विधानसभा चुनाव में वोटों से नहीं की जा सकती। राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय चुनावों में मतदाताओं का मूड अलग-अलग रहता है। दिल्ली व आप के लिए खासतौर से यह बात इसलिए भी अहम है कि पार्टी का इस चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर सीधे दखल नहीं है।
उधर, 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिले वोट आप व कांग्रेस को मिले वोट से कम थे। इस लिहाज से माना जा रहा है कि कांग्रेस व आप के बीच समझौता होने से भाजपा को दिल्ली की सातों सीटों पर कड़ी टक्कर दी सकती है। इसी रणनीतिक सोच के बीच आप गठबंधन पर हां-ना के बीच अभी भी फंसी हुई है।