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सिसोदिया का शक- ‘एलजी कहीं भ्रष्ट सिस्टम को तो नहीं बचा रहे’

Thu, 28 Dec 2017 10:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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manish sisodia - फोटो : अमर उजाला
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सरकारी सेवाओं की होम डिलीवरी कराने के दिल्ली सरकार के प्रोजेक्ट की राजनिवास से वापसी के दूसरे दिन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल अनिल बैजल पर हमला बोला।
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सिसोदिया ने आशंका जाहिर की कि उपराज्यपाल कहीं मौजूदा भ्रष्ट सिस्टम को बचाने की कोशिश तो नहीं कर रहे हैं। साथ ही उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट में उपराज्यपाल व दिल्ली सरकार के क्षेत्राधिकार से जुड़े मामले में फैसला चुनी हुई सरकार के हक में ही आएगा।

दरअसल, बीते महीने दिल्ली कैबिनेट ने होम डिलीवरी प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। इसमें जाति, आय, जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र जैसी 40 सेवाओं को लोगों को उनके घर पर मुहैया कराया जाना है, लेकिन कुछ आपत्तियों के साथ प्रोजेक्ट पर दोबारा विचार करने की सलाह देते हुए उपराज्यपाल ने फाइल वापस लौटा दी।
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बुधवार को मीडिया के सामने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की दलील दी कि सुरक्षा के नजरिये से पूरा सिस्टम फुल प्रूफ है। मोबाइल सहायक के तौर पर एक कर्मी आम लोगों की मांग पर उनके घर जाएगा।

वहीं फॉर्म भरेगा, दस्तावेज अपलोड करेगा और तस्वीर खींचने के लिए कैमरा व बायोमीट्रिक पहचान के लिए उसके पास मशीन होगी। सरकारी फीस भी वहीं जमा हो जाएगी। एक बार प्रमाणपत्र तैयार होने के बाद एजेंसी इसकी होम डिलवरी भी करेगी। इसमें न तो सुरक्षा का कोई मुद्दा होगा और न ही दस्तावेज गायब होने का डर।

सिसोदिया ने दिया दो सर्वे का हवाला

manish sisodia - फोटो : अमर उजाला
मनीष सिसोदिया के मुताबिक, बावजूद इस सबके उपराज्यपाल को योजना पर एतराज है। इससे आशंका बनती है कि वह मौजूदा भ्रष्ट सिस्टम को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

सिसोदिया ने सवाल किया कि एक चुनी हुई सरकार के जनहित से जुड़े फैसले को निरस्त करने या उसे वापस भेजने का एक नियुक्त उपराज्यपाल को रोकने का क्या अधिकार है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट में चुनी हुई सरकार व उपराज्यपाल के क्षेत्राधिकार पर सुनवाई चल रही है। अदालत इस योजना को ध्यान में रखकर दिल्ली वालों के हित में फैसला सुनाएगी।

हालांकि, उन्होंने योजना की फाइल संशोधित कर दुबारा उपराज्यपाल के पास भेजने के बारे में कुछ भी नहीं कहा। उनके मुताबिक, सरकार फिलहाल सभी संभव विकल्पों पर विचार कर रही है। इस बारे में जल्द ही फैसला लिया जाएगा।

मनीष सिसोदिया ने बताया कि प्रोजेक्ट तैयार कराते वक्त राजस्व व परिवहन विभाग के कार्यालयों पर एक सर्वे कराया गया था। परिवहन विभाग के सर्वे में 255 लोगों व राजस्व में 214 लोगों की राय ली गई थी।

दोनों सर्वे में शामिल लोगों ने कहा कि उन्हें प्रमाणपत्र बनवाने के लिए न्यूनतम दो बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। वहीं, अलग-अलग वजहों से इनका ऑनलाइन सेवा पर भरोसा नहीं था।

दिलचस्प यह कि दफ्तर आने वाले लोगों को एक ट्रिप में 100-1000 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। इसकी जगह दिल्ली सरकार के प्रोजेक्ट में अधिकतम 50 रुपये का सर्विस चार्ज देना होगा।

उपराज्यपाल की आशंकाएं

lg anil baijal - फोटो : अमर उजाला
1. फिलहाल दौर सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी का है। डोर स्टेप स्कीम की जरूरत नहीं है।
2. प्रोजेक्ट में शामिल 40 सेवाओं में से 35 पहले ही ऑनलाइन हैं। इस गैप को भरने की जरूरत है।
3. डोर स्टेप डिलीवरी की जगह सुविधा केंद्र बनाया जाए। 
4. इससे दिल्ली वालों की सेफ्टी व सिक्योरिटी को खतरा हो सकता है। 
5. इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।
6. प्रोजेक्ट से दस्तावेज गायब होने की आशंका है। 
7. सेवाएं लोगों तक देरी से पहुंचेंगी। 
8. फील्ड ट्रिप बढ़ेगी और प्रदूषण बढ़ेगा।
9. फीस लगाने से लोगों पर बोझ बढ़ेगा।
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उपमुख्यमंत्री के जवाब

Delhi Deputy Chief Minister Manish Sisodia - फोटो : File Photo
1. प्रोजेक्ट डिजिटल डिलीवरी से आगे ले जाने वाला है। घर या दफ्तर में कंप्यूटर लगाने भर से डिजिटल डिलीवरी नहीं होगी। प्रोजेक्ट इसे सुनिश्चित करने का सबसे बेहतर माध्यम है। ये सुपर डिजिटल डिलीवरी है। 
2. पहले से भले ही 35 सेवाएं ऑनलाइन हैं। फिर भी करीब 25 लाख लोगों को दफ्तर जाना पड़ता है। इस गैप को भरने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया गया है।
3. सुविधा केंद्र लगाने के प्रयोग फेल हो चुके हैं। पिछली सरकार ने दिल्ली में जीवन केंद्र स्थापित किए थे, उससे कम होने की बजाय भ्रष्टाचार बढ़ गया।
4. ई-कॉमर्स के जमाने में डोर स्टेप डिलीवरी पर सेफ्टी-सिक्योरिटी का खतरा कैसे हो सकता है। यूं तो पिज्जा वाले, एलआईसी एजेंट, पोस्टमैन, बैंक अकाउंट खोलने के लिए घर आने वाले, क्रेडिट कार्ड बनाने के लिए घर आने वाले भी सिक्योरिटी सेफ्टी के लिए खतरा हैं। इसका मतलब यह भी हुआ कि अब लोग चिट्ठी पोस्ट ऑफिस से लाएं। 
5. इस प्रोजेक्ट से भ्रष्टाचार खत्म होगा। इसमें घर पहुंचने वाले कर्मी का 100 परसेंट फीडबैक सिस्टम है, इसलिए भ्रष्टाचार जीरो हो जाएगा।
6. कर्मी घर जाकर दस्तावेज स्कैन करेगा और मौके पर ही उसे ऑनलाइन अपलोड भी करेगा। इससे दस्तावेज गायब होने का खतरा कहां से पैदा हो गया।
7. यह बहुत तेज सिस्टम है। अभ्यर्थी की सहूलियत के हिसाब से कर्मी घर पहुंचेगा। इससे तेज सिस्टम क्या होगा।
8. इससे सड़कों पर भीड़ व प्रदूषण बढ़ने का तर्क समझ से परे है। 
9. सर्विस मौजूदा सिस्टम से काफी सस्ती पड़ेगी। 
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