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सिसोदिया के इन 9 सवालों का जवाब दे पाएंगे हर्षवर्धन?

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आम आदमी पार्टी (आप) ने एक बार फिर एम्स के सीवीओ पद से हटाए गए मामले में केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और भाजपा नेता जेपी नड्डा पर निशाना साधा है। पार्टी का आरोप है कि स्वास्थ्य मंत्री इस मामले में देश को गुमराह कर रहे हैं।
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लिहाजा भ्रष्टाचार से लड़ने की उनकी मंशा पर सवालिया निशान लग जाता है। वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने इस बारे में डॉ. हर्षधर्वधन को खुली चिट्ठी लिखी है। सिसोदिया ने इसमें तीखे सवाल किए हैं।

सिसोदिया का कहना है कि संजीव चतुर्वेदी को एम्स के मुख्य सतर्कता अधिकारी पद से हटाए जाने के मामले में डॉ. हर्षवर्धन भ्रामक बयान दे रहे हैं। आरोप है कि चतुर्वेदी को हटाने का फैसला राजनीतिक दवाब में लिया गया।
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भाजपा नेता के इशारे पर एम्स में घोटाला?

सिसोदिया ने स्वास्थ्य मंत्रालय की 24 सितंबर की उस विज्ञप्ति को चुनौती दी है, जिसमें मंत्रालय ने कहा है कि चतुर्वेदी की काम की रूपरेखा तय करने में भाजपा महासचिव और राज्यसभा सांसद जेपी नड्डा की कोई भूमिका नहीं रही है।

सिसोदिया का मानना है कि एम्स जैसे उच्च संस्थान में एक ईमानदार अधिकारी को हटाने के लिए असंवैधानिक कदम उठाए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय मामले में झूठी दलील दे रहा है। इससे देश की जनता को गुमराह करने की कोशिश हो रही है।

जेपी नड्डा एम्स में चल रहे करोड़ों रूपए के भ्रष्टाचार के घोटाले की सीबीआई जांच को प्रभावित करने और सीबीआई जांच का सामना कर रहे इस घोटाले के आरोपी आईएएस अधिकारी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

पढ़िए मनीष सिसोदिया के 9 सवाल एक साथ

-क्या स्वास्थ्य मंत्री इस तथ्य से इंकार कर सकते हैं कि स्वास्थ्य सचिव की हस्ताक्षरित फाइल चौदह अगस्त को एम्स भेजी गई थी?-क्या यह सच नहीं है कि संजीव चतुर्वेदी की रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने नौ फरवरी को 3750 करोड़ रुपये के घोटोले के आरोपी आईएएस अधिकारी विनीत चौधरी के खिलाफ केस दर्ज किया।-क्या यह सच नहीं है कि बीजेपी नेता जेपी नड्डा ने आपसे चौधरी के खिलाफ चल रहे सीबीआई जांच रूकवाने को कहा था?-क्या यह सच नहीं है कि पिछले एक साल में नड्डा ने चतुर्वेदी को एम्स के मुख्य सतर्कता अधिकारी पद से हटाने को लेकर चार पत्र लिखे?-क्या यह सच नहीं है कि विनीत चौधरी वर्ष 2001-2003 में हिमाचल प्रदेश में शिक्षा सचिव थे?  नड्डा उसी दौरान राज्य के शिक्षा मंत्री थे। इसी वजह से वे विनीत चौधरी को बचाना चाहते हैं?-क्या आप एक भी पत्र या संजीव चतुर्वेदी के मामले में किया गया पत्रव्यहार का हवाला दे सकते हैं जिसमें कहीं भी इस बात का जिक्र हो कि चतुर्वेदी की एम्स के मुख्य सतर्कता अधिकारी पद पर नियुक्ति अस्वीकार की जाती है?-क्या चतुर्वेदी की नियुक्ति से जुड़ी सभी समितियों ने स्वीकार नहीं किया था कि उनकी नियुक्ति नियमों के मुताबिक हुई है।-क्या यह सच नहीं है कि आपने चतुर्वेदी को हटाने के मामले में स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों पर उनका रूख बदलने के लिए दबाव डाला?-क्या यह सच नहीं है कि एम्स की इंडोक्रोनोलॉजी विभाग की पूर्व अध्यक्ष डॉ. एसी अमिनी पर सीबीआई और एम्स अधिकारियों द्वारा जुर्माना लगाया गया था लेकिन आपकी वजह से डॉ. अमिनी को जुर्माना भरने में छूट दी गई क्योंकि वे एक शीर्ष केंद्रीय मंत्री की नजदीकी थी?

संजीव चतुर्वेदी ने भी लिखी चिट्ठी

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पूर्व चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) संजीव चतुर्वेदी ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को एक पत्र लिखा है, जिसमें कई तथ्य सामने रखे हैं। संजीव चतुर्वेदी ने पत्र के माध्यम से केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को देश का नेशनल मोटो सत्यमेव जयते की याद दिलाई है।

पत्र में कहा गया है कि मंत्रालय की ओर से एम्स सीवीओ मामले में बार-बार गलत तथ्य पेश किये जा रहे हैं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है। लिहाजा उन्होंने अपनी बात सबके सामने रखने के लिए मीडिया से बातचीत करने की इजाजत मांगी है।

एम्स के पूर्व सीवीओ और वर्तमान डिप्टी सेकेरेट्री संजीव चतुर्वेदी ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को लिखे पत्र में कहा है कि पिछले एक महीने में मंत्रालय की ओर से इस मामले में तीन-तीन प्रेस विज्ञप्ति जारी किए गए हैं, हर बार अलग-अलग तथ्य सामने आए हैं।
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'सीवीसी को क्यों ठहराया जिम्मेदार'

पत्र में संजीव ने लिखा है कि सीवीसी ने उनके नाम को बतौर सीवीओ कभी रिजेक्ट नहीं किया, लेकिन गलत तथ्य पेश करके कहा गया कि सीवीसी ने उनके नाम को रिजेक्ट किया है।

पत्र में कहा गया है कि मंत्रालय प्रधानमंत्री कार्यालय के आदेश और संसदीय समिति से किए गए वायदे को नजर अंदाज किया जा रहा है। पत्र में यह भी कहा गया है कि मंत्रालय की ओर से सीवीसी को बताया गया है कि सीवीओ की नियुक्ति के संबंध में एम्स की आईबी और जीबी के फैसले का इंतजार है।

जबकि एम्स की आईबी और जीबी की बैठक में सीवीओ का पद सृजित करने का निर्णय काफी पहले लिया जा चुका है। आईबी और जीबी की अनुमति के बाद ही एम्स में सीवीओ की नियुक्ति की गई।

स्वास्थ्य मंत्री को लिखे पत्र में भाजपा सांसद जे.पी.नड्डा की ओर से लिखे गए तमाम पत्रों का भी जिक्र किया गया है। यह भी पूछा गया है कि जे.पी.नड्डा की बाकी मांगों पर मंत्रालय का क्या रूख है?
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