मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 में शुक्रवार रात जिस जूता फैक्टरी में भीषण आग लगी, उसके पास फायर एनओसी नहीं थी। वर्ष 2021 में फैक्टरी के निर्माण के समय मालिक की ओर से केवल एमसीडी में नक्शा पास कराने के लिए आवेदन किया गया था।
नोट - मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में यदि औद्योगिक बिल्डिंग का कुल क्षेत्रफल 250 वर्ग मीटर से अधिक है, तो फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट लेना आवश्यक होता है।
दो और शवों का पोस्टमार्टम, परिजन बोले-अब तक नहीं मिली आर्थिक मदद
मंगोलपुरी स्थित जूता फैक्टरी में आग लगने से जान गंवाने वाले अशोक और लालबाबू के शव का रविवार को पोस्टमार्टम कराया गया। शनिवार को प्रेमचंद और हरिहर के शवों का पोस्टमार्टम हो चुका था। अशोक और लालबाबू के परिजनों के दिल्ली नहीं पहुंच पाने के कारण दोनों के शवों का पोस्टमार्टम रविवार तक टल गया था।
अशोक के पिता नागेंद्र रविवार को रिश्तेदार के साथ फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह बेटे का शव लेकर एंबुलेंस से अपने गांव के लिए रवाना हो गए। अशोक के फूफा उमेश ने बताया कि परिवार पहले से आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। हादसे ने परिवार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। वहीं, लालबाबू के शव का पोस्टमार्टम होने के बाद उनका बेटा मुकेश शव लेकर उत्तर प्रदेश के देवरिया स्थित गांव के लिए रवाना हुआ।
इधर, मृतकों के परिजनों ने अब तक आर्थिक सहायता नहीं मिलने पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हादसे के बाद से प्रशासन की ओर से परिवारों को कोई आर्थिक मदद नहीं दी गई है। ऐसे में अपनों को खोने के बाद परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों और भविष्य के खर्च को पूरा करने का संकट खड़ा हो गया है।