नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट ने 59 वर्षीय व्यक्ति को अपनी नाबालिग पोती के साथ दुष्कर्म करने के जुर्म में सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंकित मेहता ने दोषी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 10 (गंभीर यौन उत्पीड़न) के साथ-साथ महिला के कपड़े उतारने, उसकी गरिमा को ठेस पहुँचाने, चोट पहुंचाने और आपराधिक धमकी देने के आरोपों में दोषी ठहराया है। सरकारी वकील विनीत दहिया ने कहा कि दोषी किसी भी तरह की नरमी का हकदार नहीं है, क्योंकि उसने 10 साल की बच्ची का आठ महीने से अधिक समय तक यौन उत्पीड़न किया जिससे उसे भारी मानसिक आघात पहुंचा। अदालत ने लड़की को हुई मानसिक पीड़ा के लिए तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया। ब्यूरो