ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा, सेल्फ-डिक्लेरेशन से मिलेगा लाइसेंस, फिजिकल निरीक्षण खत्म
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी में कारोबार को आसान बनाने की दिशा में दिल्ली सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी (वजन एवं माप) सेक्टर में लाइसेंस व्यवस्था को सरल करते हुए अब इसे लाइफटाइम वैधता दे दी है। इस फैसले से मैन्युफैक्चरर्स, डीलर्स और रिपेयरर्स को बार-बार लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया से राहत मिलेगी। उद्योग एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इसे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने की दिशा में बड़ा सुधार बताया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ कम होगा और समय व लागत दोनों की बचत होगी। यह बदलाव दिल्ली लीगल मेट्रोलॉजी (एनफोर्समेंट) रूल्स, 2011 में संशोधन के तहत किया है। नई व्यवस्था के अनुसार अब लाइसेंस जारी करने से पहले अनिवार्य फिजिकल साइट निरीक्षण की जरूरत समाप्त कर दी गई है। इसके स्थान पर सेल्फ-डिक्लेरेशन के आधार पर लाइसेंस जारी किए जाएंगे, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी।
सरकार की डिरेगुलेशन एक्सरसाइज 2.0 के तहत किए गए इस सुधार का उद्देश्य नियमों को सरल बनाना और कारोबार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है। मंत्री सिरसा ने कहा कि ईमानदार कारोबारियों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई और जटिल प्रक्रियाओं से गुजरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। सरकार भरोसे पर आधारित सिस्टम विकसित कर रही है, जो जवाबदेही भी सुनिश्चित करेगा। फिलहाल दिल्ली में लीगल मेट्रोलॉजी सेक्टर के तहत 600 से अधिक सक्रिय व्यवसाय काम कर रहे हैं, जिनमें 154 निर्माता, 421 डीलर और 24 रिपेयरर शामिल हैं। नई व्यवस्था लागू होने से इन सभी को सीधे लाभ मिलेगा।
कारोबार को मिलेगी स्थिरता : लाइसेंस व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब एक बार निर्धारित शुल्क देकर प्राप्त किया गया, लाइसेंस तब तक वैध रहेगा, जब तक सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसे निलंबित या रद्द न किया जाए। इससे कारोबारियों को स्थिरता मिलेगी और बार-बार के नवीनीकरण में लगने वाला समय और खर्च बचेगा। इसके साथ ही फॉर्म, रजिस्टर और अन्य प्रक्रियाओं में भी बदलाव किए गए हैं, ताकि पूरी प्रणाली नई सरल व्यवस्था के अनुरूप काम कर सके। सरकार जल्द ही एक डिजिटल ऐप भी लॉन्च करने जा रही है, जिससे वेरिफिकेशन और अन्य सेवाएं ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध होंगी।