एम्स के ईएनटी विभाग में 25 जनवरी 2017 को हुमायूंपुर निवासी 25 वर्षीय बेबी के ओपीडी कार्ड पर एक नहीं, बल्कि तीन बार सुशीला देवी नामक मरीज का बारकोड चस्पा किया गया। मरीज के पास अब एम्स की जांच रिपोर्ट भी नहीं है और न ही उसने गलत बार कोड पर ध्यान दिया। अंसारी नगर निवासी विजय राम ने इसकी शिकायत डॉक्टरों से की थी। 15 नवंबर 2017 को एम्स के मनोरोग विभाग में इलाज कराने पहुंचे विजय राम के कार्ड पर हरी चंदेल नामक किसी और मरीज का बारकोड लगा दिया गया और रिपोर्ट दे दी। विजय राम की रिपोर्ट पर निगाह गई तो उसने शिकायत विभागीय डॉक्टर से भी की। इसके बाद प्रयोगशाला से दूसरी रिपोर्ट दी गई।
कई बार सैंपल ही हो जाते हैं गायब
एम्स में पिछले कुछ समय से रक्त नमूने (सैंपल) खो जाने की शिकायत भी सामने आ रही हैं। यहां आने वाले मरीजों को नमूना खो जाने का हवाला दिया जाता है। इसके चलते मरीज को दोबारा उसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके कारण मरीज को इलाज मिलने में काफी समय लगता है।
लापरवाही हो सकती है आपराधिक
दिल्ली मेडिकल काउंसिल के सचिव डॉ. गिरीश त्यागी का कहना है कि एम्स जैसे संस्थान में इस तरह की घटना हो रही है तो यह काफी गंभीर विषय है। इसे लापरवाही नहीं, बल्कि आपराधिक गतिविधि कहेंगे, क्योंकि इसकी वजह से मरीजों को गलत उपचार मिल सकता है।