दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर सेक्टर-65 के पास एक हाइवा चालक जिंदा जल गया। हादसा मंगलवार तड़के सुबह पांच बजे हुआ। कोहरे के कारण चालक को हाईवे पर चल रहा निर्माण कार्य देरी से दिखाई दिया। देखते ही आगे चल रहे हाइवा चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिया, जिससे पीछे चल रहा हाइवा जा टकराया। इस कारण आग लग गई। इस दौरान पीछे चल रहे हाइवा का चालक केबिन में फंस गया। इससे पहले कि उसे बाहर निकाला जाता, वह आग की लपटों में घिरकर जिंदा जल गया। बाद में पहुंची दमकल ने आग बुझाई लेकिन तब तक चालक जलकर खाक हो चुका था।
मृतक की पहचान राजस्थान के जिला सीकर स्थित गांव मोठूका पाटन निवासी रूपेश सिंह (31) के रूप में हुई है। रूपेश की दो बेटियां और एक बेटा है। तीनों की उम्र सात से 11 वर्ष के बीच है। हादसा सुबह करीब पांच बजे का है। दोनों हाइवा राजस्थान से रोड़ी भरकर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से होते हुए सेक्टर-73 फरीदाबाद जा रहे थे। एक हाइवा को उत्तर प्रदेश के जिला एटा स्थित गांव जटौली निवासी सिलेस आगे-आगे चला रहा था। रूपेश का हाइवा ठीक पीछे चल रहा था।
गांव साहूपुरा के पास बने फ्लाईओवर से उतरते हुए आगे चल रहे चालक सिलेस को कोहरे के कारण हाईवे का निमार्ण कार्य देरी से दिखाई दिया। निर्माण कार्य के बैरिकेड देखकर सिलेस ने अचानक से ब्रेक लगा दिए। पीछे चल रहे रूपेश्या को जब तक कुछ समझ आता, उसका वाहन आगे चल रहे हाइवा से जा टकराया। वाहनों की गति इतनी तेज थी कि रूपेश के हाइवा का केबिन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। इस कारण रूपेश केबिन के अंदर ही फंस गया।
उसके हाइवा का डीजल टैंक फट गया और शॉर्ट सर्किट से वाहन ने आग पकड़ ली। अगले हाइवा में सवार चालक और सहायक नीचे उतरे और रुपेश को बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन तब तक आग भयावह रूप धारण कर चुकी थी।सूचना पाकर पुलिस और दमकल विभाग की गाड़ी मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। इससे पहले दोनों हाइवा के सभी टायर और केबिन जलकर राख हो चुके थे। पुलिस हादसे के बाद फरार चालक सिलेस की तलाश कर रही है।
शादी में जाने के कारण साथ नहीं आया था सहायक नरेश
रूपेश के भतीजे सूबे सिंह ने बताया कि उसकी गाड़ी में उसके साथ सहायक के रूप में उसी के गांव का रहने वाला नरेश भी साथ रहता था। मंगलवार को हाइवा में सामान भरवाने के बाद वह गांव में ही रुक गया। वह साथ होता तो उसकी भी जान का संकट हो सकता था। रूपेश की गाड़ी का केबिन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था।
ऐसे में नरेश भी साथ ही फंस सकता था। हादसे के बाद जल रहे दोनों हाइवा को देखकर आसपास के लोगों ने रेत डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश की थी लेकिन टायर के आग पकड़ते ही गाड़ी से धमाके की आवाज आनी शुरू हो गई।