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पटाखों पर बैन के बाद बीजेपी के मंत्री बोले- परेशानी हो तो मध्य प्रदेश में दिवाली मनाएं दिल्लीवाले

Tue, 10 Oct 2017 06:19 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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एमपी के गृहमंत्री - फोटो : ani
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली-एनसीआर में इस बार दिवाली पर पटाखे बेचने पर लगाए गए बैन के बाद आज दिल्लीवालों को मध्य प्रदेश(एमपी) के गृहमंत्री ने द‌िवाली मनाने का न्यौता भेजा है।
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मध्यप्रदेश के गृहमंत्री ने अपने बयान में कहा है कि अगर दिल्ली में कोई कठिनाई है तो मध्य प्रदेश में आ जाएं, दिवाली मनाएं। एमपी में पॉल्यूशन लेवल दिल्ली से कम है। Agar Delhi mein koi kathinai hai to Madhya Pradesh mein aa jayein Diwali manayein.MP mein pollution level Delhi se kamm hai-MP Home Minister pic.twitter.com/cmAWyfTrNz
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— ANI (@ANI) October 10, 2017 दिवाली में दिल्ली-एनसीआर में नहीं बिकेंगे पटाखे
दिल्ली-एनसीआर में इस साल 19 अक्तूबर को दिवाली पर पटाखों की बिक्री नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है, जो 31 अक्तूबर तक जारी रहेगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि पटाखों की बिक्री की इजाजत देने के संबंध में उसका 12 सितंबर का आदेश एक नवंबर, 2017 से लागू माना जाएगा।

जस्टिस एके सीकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत ने 12 सितंबर के आदेश में कोई परिवर्तन नहीं किया है, बल्कि पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने वाले 11 नवंबर, 2016 के अपने आदेश को एक मौका देने का फैसला किया है क्योंकि वह देखना चाहता है कि इस पाबंदी का हवा की गुणवत्ता पर क्या असर होता है। मालूम हो कि अर्जुन गोपाल एवं दो अन्य नाबालिग बच्चों ने पटाखों पर पाबंदी लगाने वाले सुप्रीम कोर्ट के पिछले साल के आदेश को बहाल करने की याचिका दायर की है।
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सीपीसीबी ने 20 साल पहले माना, सल्फर वाले पटाखों पर रोक लगनी चाहिए

दिल्ली एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर लगी रोक - फोटो : अमर उजाला
याचियों की ओर से पेश अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायणन ने कहा कि पटाखों की बिक्री पर रोक हटाने के सुप्रीम कोर्ट के 12 सितंबर, 2017 के आदेश के बाद उनके हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज लगे हैं जिनमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने 20 साल पहले माना था कि सल्फर वाले पटाखों पर रोक लगनी चाहिए।

क्योंकि जलने के बाद इससे सल्फर डाई ऑक्साइड पैदा होता है जो सेहत के लिए अत्यंत घातक होता है। जबकि पिछले साल पटाखों पर प्रतिबंध के मामले में सुनवाई के दौरान सीपीसीबी और दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से यह तथ्य छुपाया था।

स्थायी लाइसेंसधारी पटाखा विक्रेताओं के वकील ने पिछले साल नवंबर के आदेश को बहाल करने का विरोध करते हुए कहा कि 12 सितंबर का सुप्रीम कोर्ट का आदेश सीपीसीबी सहित सभी पक्षों को सुनने के बाद दिया गया था। इसलिए उसे बदलने की जरूरत नहीं है। हालांकि पटाखों से हवा की गुणवत्ता खराब होती है लेकिन यह पार्टीकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 के बढ़ने के पीछे मुख्य वजह नहीं है।

चेतन भगत ने किया विरोध
मशहूर लेखक चेतन भगत ने पटाखों पर पाबंदी का विरोध किया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उन्होंने कई ट्वीट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया जताई। उनका कहना है कि यह हमारी परंपरा का हिस्सा है। बिना पटाखों के बच्चों की कैसी दिवाली? वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए इसे गैर जरूरी बताते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन की बेहतर सुविधा वायु प्रदूषण पर ज्यादा कारगर तरीके से रोक लगा सकती है। जो लोग दिवाली में सुधार लाना चाहते हैं उन्हेें उन त्योहारों में भी बदलाव पर ध्यान देना चाहिए जिनमें बेजुबान जानवरों का खून बहाया जाता है।
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