हसनपुर डिपो के पास रविवार को दक्षिणपुरी निवासी कार सवार योगेश कुमार की हत्या मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मामले में गिरफ्तार एक आरोपी रविंद्र उर्फ राजू ने अपनी मृत्यु का फर्जी प्रमाणपत्र बनवा रखा था।
वह फर्जी प्रमाणपत्र को कोर्ट में दाखिल कराना चाहता था। उसे लग रहा था कि अगर वह खुद को मृत घोषित कर देगा तो पुलिस उसे ढूंढेगी नहीं और वह अपने भाई की हत्या का बदला योगेश से आसानी से ले सकेगा।
स्पेशल सेल में तैनात इंस्पेक्टर विनोद बडौला की टीम ने योगेश की हत्या के आरोप में सोमवार को नासिर, राजू, विवेक और राजीव को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद राजू के जिंदा होने की बात सामने आई। राजू के खिलाफ 10 मामले दर्ज हैं। उसने वर्ष 2016 में मनोज की हत्या कर दी थी।
इस मामले में वह जमानत पर था। स्पेशल सेल के अधिकारियों के मुताबिक कासगंज निवासी राजू घर के पास डॉक्टर के पास दवा लेने गया था। वहां से 50 रुपये में देकर डॉक्टर का खाली पर्चा (लेटरहैड) हासिल कर लिया था। अपने साथी विवेक उर्फ विक्की की सहायता से कंप्यूटर से लैटरहैड पर अपना मृत्यु प्रमाणपत्र बना लिया था। उसने प्रमाणपत्र में लिखा कि 10 जून 2020 को रात 11:50 बजे उसे कासगंज में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उसे बचाने के लिए वेंटिलेंटर पर रखा।
दूसरे दिन उसे दोपहर सवा दो बजे मृत घोषित कर दिया। फर्जी प्रमाण पत्र में ड्रग के ओवरडोज से लीवर, किडनी और शरीर के अन्य अंग फेल होने को मौत का कारण बताया गया है। प्रमाणपत्र पर अस्पताल का नाम व संपर्क नंबर पर लिखे हुए हैं। उसने खुद को मृत दिखाते हुए फोटो खींचकर वायरल कर दी थी। राजू ने अपने साथियों के जरिए अपनी मौत होने की खबर फैला दी थी।