दिल्ली के अस्पतालों में दिल्लीवासियों का ही इलाज करने के दिल्ली कैबिनेट के फैसले को पलटने के बाद हमलावर हुई दिल्ली सरकार को मंगलवार शाम उपराज्याल ने जवाब दिया है। एलजी ने कहा कि दिल्ली सरकार का फैसला पलटकर संविधान की रक्षा की गई है।
राजनिवास की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि मंगलवार को डीडीएमए की बैठक में उपराज्यपाल ने उपमुख्यमंत्री को स्पष्ट किया कि दिल्ली कैबिनेट का फैसला संविधान के समानता के अधिकार और जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन करता था।
इसमें स्वास्थ्य का अधिकार भी शामिल है। इसी तरह के दिल्ली सरकार के पहले के एक प्रयास को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इन संदर्भो में उन्होंने कैबिनेट के फैसले को सोमवार को पलट दिया है।
इतना ही नहीं, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को यह भी बताया गया था कि अस्पताल में आने वाले हर मरीज का इलाज करना राज्य की सांविधानिक जिम्मेदारी है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोई भी जिम्मेदार सरकार किसी के निवास स्थान के आधार पर इलाज में भेदभाव करे।
राजनिवास की तरफ से कहा गया है कि उपराज्यपाल को इस बात की पूरी जानकारी है कि दिल्ली में चिकित्सा आधारभूत संरचना को बढ़ाने की जरूरत है। समय-समय पर प्राधिकरण की बैठक में इस पर चर्चा भी हुई है। बैठक में भी फैसला लिया गया है कि इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम, त्यागराज स्टेडियम, जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम, प्रगति मैदान जैसे स्थानों को मेक शिफ्ट चिकित्सा सुविधा व अस्पताल बनाया जाए।
इसके साथ ही बैंक्वेट हॉल, विवाह स्थलों आदि का इस्तेमाल करने का भी निर्णय लिया गया। उपराज्यपाल ने सभी संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि दिल्ली की स्वास्थ्य सुविधा का तेजी से विस्तार करें। इसके लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा-50 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल किया जाए।