अब पहले जैसी बात नहीं है, हमारे प्रति लोगों की सोच बदल रही है। हम भी जमाने के साथ कदमताल करना चाहते हैं। ठीक है, राजनीतिक दलों का हम पर फोकस नहीं है। हम संख्या में कम हैं तो जाहिर सी बात है कि राजनेता अपना अटेंशन हमारे ऊपर क्यों करेंगे। यही वजह रही कि किसी भी राजनीतिक पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में हमारे लिए कुछ करने की बात तो दूर, बल्कि हमारा जिक्र तक करना जरूरी नहीं समझा। खैर कोई बात नहीं, आने वाले समय में हम उठेंगे और सत्ता में भागीदारी के लिए कदम आगे बढ़ाएंगे। संसद और विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। बाकी तो जनता है, वही बताएगी कि हम सही राह पर हैं या रास्ता भटक गए हैं। यह कहना है थर्ड जेंडर रेहाना यादव का। वे दिल्ली में कम्युनिटी एम्पावरमेंट ट्रस्ट की अध्यक्ष हैं।
लोकसभा चुनाव में बतौर थर्ड जेंडर वे पहली बार वोट डालेंगे। इनका कहना है कि दिल्ली में हमारी संख्या दस हजार से ज्यादा है। हालांकि सरकारी आंकड़ों में छह सौ से अधिक थर्ड जेंडर चुनाव आयोग की मतदाता सूची में पंजीकृत हैं। इसके अलावा बाकी सैंकड़ों थर्ड जेंडर बतौर महिला या पुरुष वोटर लिस्ट में शामिल हैं। यादव कहती हैं कि पिछले लोकसभा चुनाव में थर्ड जेंडर का मतदान प्रतिशत 46 था, इस बार वह संख्या 70 फीसदी के पार पहुंचेगी। भले ही हमारे पास राजनीतिक दल या उनके प्रतिनिधि वोट मांगने के लिए नहीं आ रहे हैं, लेकिन हम इतना तो जान ही गए हैं कि वोट को खराब नहीं जाने देना है। मतदान में जोर-शोर से भाग लेना है। इसके लिए हम अपने सभी साथियों से वोट डालने की अपील कर रहे हैं। हम संख्या में ही तो कम हैं, कोई बात नहीं, लोकतंत्र को मजबूत बनाने में तो अपना योगदान दे ही सकते हैं। अगली बार संसद और विधानसभा, दोनों चुनावों में थर्ड जेंडर खडे होंगे। उम्मीद है कि राजनीतिक दल हमें समझेंगे।