नोएडा में डीटीसी बसों को रोजाना एक लाख रुपये का नुकसान सहना पड़ रहा है। यह नुकसान अवैध तरीके से चलने वाली निजी बसों व ई-रिक्शों की वजह से हो रहा है। अब इसका उपाय डीटीसी ढूंढने में लगी है।
दरअसल, शहर में कई रूट ऐसे हैं, जहां निजी बसों ने डीटीसी की रूट को अपना लिया है। इन रूटों पर हर समय यह बसें तैनात रहती हैं। इस वजह से नजदीक जाने वाले यात्री ऐसे बसों का सहारा लेते हैं और डीटीसी का राजस्व इनके खाते में जाता दिखाई देता है।
दूसरी ओर से शहर के कई छोटे-छोटे रूट पर ई-रिक्शा चलने से डीटीसी के राजस्व पर असर पड़ा है। खास बात यह कि इन ई-रिक्शों का अभी तक कोई रजिस्ट्रेशन भी नहीं है। ऐसे ई-रिक्शे शहर केे हर मुख्य प्वाइंट पर दिख जाएंगे।
लोगों की मानें तो कम दूरी का सफर करने के लिए ऐसे ई-रिक्शे उन्हें भाते हैं। डीटीसी बसों में होने वाली भीड़ ने लोगों को ई-रिक्शों के प्रति आकर्षित किया है।
डीटीसी प्रबंधन के मुताबिक पांच से दस रुपये की डीटीसी की सवारी ई-रिक्शों व अवैध निजी बसों को अपना रही हैं। इस वजह से डीटीसी को रोजाना करीब एक लाख रुपये का नुकसान सहना पड़ रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली से नोएडा आने वाली डीटीसी बसें रोजाना करीब 70,000 सवारी ढोती हैं। यह सवारी नकद भुगतान कर टिक ट लेती हैं।
एक अनुमान के मुताबिक करीब 30,000 सवारी पास का सहारा लेती हैं। इन्हें लेकर कुल करीब एक लाख सवारी रोजाना दिल्ली से नोएडा का सफर तय करती हैं। इसका 10-20 फीसदी सवारी भी अगर दूसरे साधन का उपयोग सफर के लिए करती हैं, जो कि 5 से 10 रुपये का टिकट लेकर डीटीसी की सवारी करती थीं तो उनके हटने से डीटीसी को रोजाना करीब एक लाख रुपये का नुकसान सहना पड़ता है।
बता दें कि नोएडा डिपो से कुल 119 बसें अलग-अलग रूट पर चलती हैं। इसके अलावा दिल्ली से कई रूटों पर बसें सीधे चलकर नोएडा आती हैं। इन सबका उपयोग करने वाली सवारियों से नोएडा डिपो को करीब 6-7 लाख रुपये का रोजाना का राजस्व प्राप्त होता है।
डीटीसी प्रबंधन का कहना है कि अगर अवैध निजी बसों व ई-रिक्शों को बंद कर दिया जाए तो डीटीसी का राजस्व एक से दो लाख रुपये रोजाना बढ़ जाएगा।