बिसरखवासी पहली बार रावण मंदिर में भगवान राम की भी पूजा करेंगे। 11 अगस्त को मंदिर में रावण के साथ भगवान राम की भी मूर्ति स्थापित की जाएगी।
खास बात यह है कि मंदिर परिसर में एक तरफ रावण की मूर्ति होगी, वहीं दूसरी ओर राम दरबार होगा। सोमवार को ग्रेटर नोएडा के वाईएमसीए क्लब में हुई प्रेसवार्ता में आचार्य अशोकानंद महाराज ने बताया कि लंकेश की जन्म स्थली में अभी तक केवल भगवान शिव की पूजा की जाती थी।
वहीं, यहां कभी राम मंदिर नहीं रहा है। अब ग्रामीणों के मत के अनुसार यहां राम दरबार की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा मोहन मंदिर योगाश्रम ट्रस्ट की स्थापना और मूर्ति स्थापना की जाएगी।
पुतला दहन रोकने को सुप्रीम कोर्ट में दी याचिका
रावण का मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
मूर्ति स्थापना के दौरान महानिर्वाणी अखाड़ा के मंगलानंद पुरी महाराज और सर्व धर्म संभाव ट्रस्ट के अखलाख अहमद और सरफराज भी मौजूद होंगे। इस दौरान सांसद उदित राज, सीमा परिहार, सांसद छोटेलाल आदि आएंगे।
पुतला दहन रोकने को सुप्रीम कोर्ट में दी याचिका
अशोकानंद ने बताया कि दशहरा में रावण का पुतला दहन न करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही याचिका दे रखी है। उनका कहना है कि रावण महाज्ञानी था। रावण उनके पूर्वज हैं। प्रत्येक वर्ष पुतला दहन होने पर उनको कष्ट होता है।
रावण मंदिर का किया विरोध
हिंदू गोरक्षा दल ने बिसरख में रावण के मंदिर की स्थापना का विरोध करने के सवाल पर अशोकानंद ने कहा कि गोरक्षा दल को विरोध करने का पूरा अधिकार है, हमें अपने पूर्वज का मंदिर बनाने का भी अधिकार है।