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Delhi NCR News: एम्स में लॉन्गेविटी कॉन्क्लेव का समापन, स्वस्थ बुढ़ापे पर मंथन

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-बुजुर्गों के स्वास्थ्य, मानसिक क्षमता, सामाजिक जुड़ाव और बेहतर जीवनशैली से जुड़े कई शोध पेश किए गए
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के बायोफिजिक्स विभाग और नेशनल सेंटर फॉर एजिंग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय लॉन्गेविटी कॉन्क्लेव का बुधवार को समापन हो गया। कॉन्क्लेव में देश-विदेश के विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने बढ़ती उम्र को बीमारी का पर्याय मानने के बजाय बुजुर्गों को स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाए रखने पर मंथन किया। यह आयोजन एसोसिएशन ऑफ जेरोन्टोलॉजी (इंडिया) के 22वें द्विवार्षिक सम्मेलन-2026 और साइंस एंड आर्ट ऑफ लॉन्गेविटी विषय के तहत किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. श्रेया बिस्वाल ने कहा कि बुजुर्गों के लिए केवल बीमारियों का उपचार पर्याप्त नहीं है। उनकी शारीरिक क्षमता, मानसिक स्वास्थ्य और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को बनाए रखना भी जरूरी है। विशेषज्ञों ने याददाश्त, नींद और शारीरिक क्षमता के बीच संबंध पर चर्चा करते हुए कहा कि उम्र से जुड़े बदलावों की समय रहते पहचान और उचित देखभाल से जीवन की गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है।
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पार्किंसन और स्ट्रोक पर शोध प्रस्तुत
न्यूरोबायोलॉजी से जुड़े सत्र में उम्र बढ़ने के दौरान मस्तिष्क में होने वाले बदलाव, याददाश्त में कमी और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों पर शोध प्रस्तुत किए गए। पार्किंसन, स्ट्रोक के बाद सुधार, उम्र से जुड़ी सुनने की समस्या और मस्तिष्क की कार्यक्षमता जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञों ने अध्ययन साझा किए।
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बुजुर्गों के अनुकूल शहरों पर जोर
विशेषज्ञों ने बुजुर्गों के अनुकूल शहर विकसित करने की जरूरत बताई। सुरक्षित आवागमन, सामाजिक जुड़ाव और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल पर चर्चा हुई। बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार रोकने, परिवार और स्वास्थ्य व्यवस्था की भूमिका मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। ऑक्यूपेशनल थेरेपी, डिजिटल एप और सामुदायिक पुनर्वास के माध्यम से आत्मनिर्भरता बढ़ाने के उपाय भी बताए गए। अंत में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार देकर कॉन्क्लेव का समापन किया गया।
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