लोकसभा चुनाव के दौरान बाउंसर (बाहुबलियों) व पहलवानों के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग और पुलिस की कड़ी नजर है। पुलिस ने जिम और अखाड़ों को चेक किया है और उन पर नजर रख रही है। इसके अलावा पुलिस चुनावों के दौरान घोषित अपराधियों और जमानत पर रिहा कैदियों पर भी नजर रख रही है। मोस्ट वांटेड और भगौड़े बदमाशों की धरपकड़ के लिए पुलिस ने विशेष अभियान चला रखा है। साथ ही डेरों पर भी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
एक सप्ताह पहले हरियाणा और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के बीच हुई अंतरराज्यीय बैठक में यह मुद्दा उठा था। इसमें यह बात निकलकर सामने आई कि चुनावों में दिल्ली-एनसीआर में बाउंसर की मांग बढ़ जाती है। इससे कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा रहता है।
चुनाव के दौरान राजनीतिक पार्टियां पहलवानों का गलत इस्तेमाल करती हैं। माना जाता है कि चुनावों में मतदाताओं को लुभाने, दूसरी पार्टी के प्रत्याशियों को धमकी देने व हिंसा फैलाने के लिए इनका इस्तेमाल होता है। प्रत्याशी के चुनाव प्रचार में एक साथ चलते यह हट्टे-कट्टे पहलवान लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनते हैं।
दिन भर के तीन हजार रुपये, खाना मुफ्त
पहलवान को बाउंसर के रूप में चुनाव में पारिश्रमिक पर रखा जाता है। एक पहलवान को दिनभर के ढाई से तीन हजार रुपये दिए जाते हैं। साथ ही एक दिन में उसके खाने-पीने पर साढ़े तीन हजार तक का खर्च आता है, जो उम्मीदवार ही उठाता है। हरियाणा व उत्तर प्रदेश से आए पहलवानों को तो मुफ्त में रहने की भी व्यवस्था की जाती है।
डेरों पर भी पुलिस की विशेष नजर
चुनावों के दौरान डेरों पर भी पुलिस की कड़ी नजर होगी। पंचकूला में गुरमीत सिंह राम रहीम के अनुयायियों और रोहतक में रामपाल के अनुयायियों द्वारा मचाए गए उत्पात के बाद पुलिस चुनावों में कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती है। ऐसे में फरीदाबाद, गुरुग्राम, पलवल और झज्जर आदि जिलों में स्थित डेरों पर भी पुलिस नजर बनाए हुए है। सीकरी स्थित गुरमीत सिंह राम रहीम के डेरे को पुलिस एक बार जांच चुकी है।
30 अप्रैल तक हथियार जमा करवाने के आदेश
शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव संपन्न करवाने के लिए पुलिस ने जिले के सभी शस्त्र लाइसेंस धारकों को 30 अप्रैल तक अपने हथियार संबंधित थाने या फिर गन हाउस में जमा करवाने के आदेश दिए हैं। पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह ने बताया कि यदि किसी शस्त्र लाइसेंस धारक ने अपने हथियार जमा नहीं करवाए तो उसके खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज कर लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।
अंतरराज्यीय अपराध नियंत्रण बैठक में जिम, अखाड़ों व डेरों का मुद्दा उठा था। बैठक में मौजूद दिल्ली व एनसीआर में लगते हरियाणा के जिलों के पुलिस अधिकारी थे। सभी से अपने-अपने क्षेत्र में जिम, अखाड़ों व डेरों पर विशेष नजर रखने को कहा गया है, ताकि चुनाव में इनका गलत इस्तेमाल न हो सके। - संजय कुमार, पुलिस आयुक्त फरीदाबाद