उत्तर-पश्चिम लोकसभा क्षेतर कहने के लिए तो देश की राजधानी का हिस्सा है, लेकिन विकास के मामले में मुख्य दिल्ली से काफी पीछे है। दस में तीन विधानसभा सीेटें भी इसी लोकसभा क्षेत्र में सुरक्षित है। हालत यह है कि इलाका विकास के लिए तरस रहा है। मतदाताओं का भी कहना है कि विकास की बात तो सभी करते है, लेकिन कई इलाकों में मूलभूत सुविधा तक नहीं। सीवर, पानी, बिजली, सड़क समेत कई सुविधाओं से वंचित है यह संसदीय क्षेत्र।
पिछड़े इलाके अधिक हैं
इस लोकसभा क्षेत्र में ज्यादातर इलाके पुनर्वास कॉलोनी व अनधिकृत, झुग्गी-झोपड़ी बस्तियां है। रोहिणी विधानसभा क्षेत्र ही ऐसा है, जहां विकास दिखाई पड़ता है। ऐसा इसलिए भी है कि इस इलाके को डीडीए ने योजनागत तरीके से निर्माण किया है। वहीं नरेला, बादली, रिठाला, किराड़ी, मंगोलपुरी समेत अन्य विधानसभा की बात करें तो दिल्ली की चकाचौध से काफी पिछड़े हुए हैं।
रोचक है मुकाबला
इलाके की जनता से चर्चा में यह बात उभर कर आई कि यहां रोचक व त्रिकोणीय मुकाबला है। उधर दबी जुबान में कांग्रेस व भाजपा के नेता यह कहते नहीं थक रहे है पार्टी ने बाहरी उम्मीदवार को टिकट दे दिया है। इससे कार्यकर्ता भी असंतुष्ट है। आम आदमी पार्टी ने भी पिछले बार राखी बिड़लान को उतारा था तो इस बार गुग्गन सिंह को मैदान में उतारा है।