शीला दीक्षित ने कहा कि मैं उदित राज को बहुत सालों से जानती हूं। जब ये भाजपा में गए थे तो आश्चर्य और दुख था लेकिन अब मुक्त हुए हैं। इनके आने से दिल्ली में हम जहां नहीं जीत रहे थे वहां भी जीतेंगे। सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा में रहकर दलितों पर प्रताडना की आवाज उठाने और पीएम को पत्र लिखने वालों में सावित्री बाई फूले, छोटेलाल, अशोक कुमार दोहरे और अब उदितराज के साथ षड्यंत्र किया गया। वेणुगोपाल ने कहा उदितराज ऐसे नेता हैं जो लगातार भाजपा की दलित विरोधी नीतियों पर आवाज उठाते रहे हैं।
भाजपा में आवाज उठाने को अपने टिकट कटने का कारण बताते हुए उदितराज ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से जुड़ा एक पुराना किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि भाजपा चुप रहने वाले दलित नेताओं को पसंद करती है और रामनाथ कोविंद को इसी का इनाम मिला है। भाजपा ने 2014 में उन्हें लोकसभा का टिकट तक नहीं दिया था। उन्होंने कहा भाजपा आरएसएस में खामोश रहने पर इनाम मिलता है। उन्होंने बताया कि 20 मई 2014 को रामनाथ कोविंद अपना बायोडाटा लेकर मेरे पास विवेक सोनकर के साथ आए थे। तब कोविंद जी ने मुझसे कहा कि भाई साहब मेरा भी कुछ कराएं। 2014 में टिकट न मिलने पर वो चुप रहे और उसका इनाम मिला।