आप सांसद संजय सिंह और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया
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आम आदमी पार्टी (आप) का कहना है कि वैचारिक मतभेद के बावजूद वह कांग्रेस से समझौता करने के लिए तैयार हुई थी। शुरुआत में आप की तरफ से दिल्ली के साथ हरियाणा, पंजाब, गोवा व चंडीगढ़ की सीटों पर बातचीत का प्रस्ताव दिया था। इन जगहों पर कुल 33 सीटें हैं। जैसे-जैसे बात आगे बढ़ती गई, एक-एक कर दूसरे राज्य छूटते गए। आखिर में बातचीत दिल्ली व हरियाणा में सिमट गई। हरियाणा के लिए भी आप सिफ तीन सीट मांग रही थी, लेकिन कांग्रेस इस पर तैयार नहीं है। आप का आरोप है कि अब कांग्रेस के रवैये समझौता साफ लग रहा है कि वह भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए गठबंधन नहीं करना चाहती।
आप की दलील, कांग्रेस का रुख अड़ियल
- दिल्ली में कांग्रेस का न तो एक सांसद है और न ही विधायक, फिर भी व दिल्ली में तीन सीट चाहती है।
- पंजाब में आप के 20 विधायक हैं व चार सांसद। लेकिन कांग्रेस आप को वहां एक भी सीट नहीं दे रही है। अगर दिल्ली के 4-3 के फॉर्मूले को पंजाब में लागू किया जाए तो वहां आप के हिस्से में 6 व कांग्रेस के 7 सीटें आएंगी।
- हरियाणा में अगर जजपा-आप व कांग्रेस के बीच समझौता हो जाता है तो सभी सातों सीटें जीत सकते हैं। जींद का दो महीने पहले का उपचुनाव से इसे समझा जा सकता है, जहां भाजपा को 50,566 वोट, जेजेपी और आप के गठबंधन को 37,631 वोट और कांग्रेस को 22,740 वोट मिले।
कांग्रेस खेल रही सियासी गद्दारी का खेल
आप शनिवार शाम से अपने कार्यकर्ताओं को एक संदेश भेज रही है। इसमें बताया गया है कि आप कांग्रेस के साथ समझौते के लिए क्यों तैयार हुई थी। साथ ही दावा किया गया है कि अगर कांग्रेस के साथ समझौता हो जाता तो भाजपा को 33 सीटों पर हराया जा सकता था। समझौता न हो पाने का जिम्मा कांग्रेस पर डालते हुऐ कहा गया है कि कांग्रेस ने देश के साथ गद्दारी का खेल खेला है।