फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली में भाजपा ने फिर मारा सत्ते पे सत्ता, 57 साल लगातार क्लीन स्वीप करने वाली दूसरी पार्टी बनी

Fri, 24 May 2019 02:00 AM IST
पूजा त्रिपाठी विजय सिंघल, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
- फोटो : विवेक निगम
विज्ञापन

राजधानी दिल्ली एक बार फिर केसरिया रंग में रंग गई। मतदाताओं ने मोदी सरकार को फिर से केंद्र में लाकर स्पष्ट कर दिया कि उनकी नजर में मोदी का कोई विकल्प उनके पास नहीं था। इन चुनावों में सबसे ज्यादा झटका आप को लगा, जो उसके लिए खतरे की घंटी है।

विज्ञापन


दिल्ली में उसके पांच प्रत्याशी तीसरे नंबर पर खिसक गए। वहीं कांग्रेस को संजीवनी मिली है पिछले चुनावों की अपेक्षा उसके पांच प्रत्याशी दूसरे नंबर पर हैं। विधानसभा चुनाव के लिहाज से यह भाजपा व आप के लिए अलार्म है। इतना ही नहीं 57 वर्ष बाद कोई पार्टी लगातार क्लीन स्वीप कर पाई है।

भाजपा ने वर्ष 2004 की तरह इस बार भी पूरा चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यानी एक बार फिर मोदी सरकार के नाम लड़ा था। हर प्रत्याशी ने दिल्ली सरकार की असफलता का मुद्दा जरूर उठाया, लेकिन प्रचार के दौरान उन्होंने पूरी तरह से मोदी सरकार पर ही मतदाताओं का ध्यान रखा। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ सर्जीकल स्ट्राइक व वायु सेना के पायलट की 24 घंटे में देश वापसी पर जोर रखा।
विज्ञापन


वहीं विदेशों में भारत की सुधरती छवि पर ही प्रचार का मुददा बनाया। नतीजा सामने है कि मतदातओं ने मोदी पर विश्वास जताया और पिछली बार की अपेक्षा से भी ज्यादा वोट भाजपा की झोली में डाल दिए। भाजपा को इस बार 2014 के मुकाबले करीब 6 प्रतिशत ज्यादा मत मिले है।

आप की उम्मीदों पर पानी फेरा

- फोटो : विवेक निगम
आंदोलन के जरिए राजधानी की राजनीति बदलने वाली आम आदमी पार्टी के लिए यह चुनाव भारी झटके के अलावा विधानसभा चुनावों में भी उसके लिए खतरे की घंटी है। आप भले ही 2004 के चुनावों में हार गई थी, लेकिन उसके सातों प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे। आप ने कांग्रेस के सभी प्रत्याशियों को काफी पीछे छोड़ दिया था। इस बार के चुनाव में आप के पांच प्रत्याशी तीसरे नंबर पर पिछड़ गए।

आप की उम्मीदों पर पानी फेरा
आप को दिल्ली में सस्ती बिजली, फ्री पानी के अलावा पूर्ण राज्य के दर्जे व शिक्षा के क्षेत्र में सुधार पर लोगों से काफी उम्मीद थी, लेकिन मतदाताओं ने केंद्र में भाजपा सरकार पर ही विश्वास जताकर उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। 2014 के मुकाबले पार्टी को करीब 14 प्रतिशत वोटों का नुकसान हुआ है।

दूसरी तरफ पूरे देश में हारने के बावजूद कांग्रेस ने दिल्ली में दूसरे स्थान पर रहकर और मत प्रतिशत में बढ़ोतरी कर वापसी की है। कांग्रेस ने पांच सीटों पर दूसरा नंबर हासिल कर विधानसभा चुनाव में अपने लिए उम्मीदें जगा दी है।
विज्ञापन

- फोटो : विवेक निगम
शुरुआती रुझान में कांग्रेस पहले तीन ही सीटों पर ही भाजपा को टक्कर देते हुए दिखाई दे रही थी, लेकिन पांच सीटों पर सीधे मुकाबले में आकर भाजपा व आप के लिए चुनौती खड़ी की है। कांग्रेस ने 2014 के मुकाबले करीब 8 प्रतिशत ज्यादा मत हासिल किए हैं।

कांग्रेस राजधानी में लगातर तीन बार सत्ता में रही है और लोग उनके कार्यकाल में हुए विकास कार्य आज भी याद करते हैं। पिछले चार वर्ष से केंद्र-आप सरकार की लड़ाई से मतदाता परेशान हो गए हैं और दिल्ली में आप के विधायकों से भी उनकी नाराजगी स्पष्ट हो गई है।

कब किस पार्टी ने किया क्लीन स्वीप
वर्ष            पार्टी              अंतर
1957        कांग्रेस            5-0
1962        कांग्रेस            5-0
1971        कांगेस           7-0
1977        भालोद            7-0
1984        कांग्रेस            7-0
1999        भाजपा            7-0
2009        कांग्रेस            7-0
2014        भाजपा            7-0
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें