आंदोलन के जरिए राजधानी की राजनीति बदलने वाली आम आदमी पार्टी के लिए यह चुनाव भारी झटके के अलावा विधानसभा चुनावों में भी उसके लिए खतरे की घंटी है। आप भले ही 2004 के चुनावों में हार गई थी, लेकिन उसके सातों प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे। आप ने कांग्रेस के सभी प्रत्याशियों को काफी पीछे छोड़ दिया था। इस बार के चुनाव में आप के पांच प्रत्याशी तीसरे नंबर पर पिछड़ गए।
आप की उम्मीदों पर पानी फेरा
आप को दिल्ली में सस्ती बिजली, फ्री पानी के अलावा पूर्ण राज्य के दर्जे व शिक्षा के क्षेत्र में सुधार पर लोगों से काफी उम्मीद थी, लेकिन मतदाताओं ने केंद्र में भाजपा सरकार पर ही विश्वास जताकर उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। 2014 के मुकाबले पार्टी को करीब 14 प्रतिशत वोटों का नुकसान हुआ है।
दूसरी तरफ पूरे देश में हारने के बावजूद कांग्रेस ने दिल्ली में दूसरे स्थान पर रहकर और मत प्रतिशत में बढ़ोतरी कर वापसी की है। कांग्रेस ने पांच सीटों पर दूसरा नंबर हासिल कर विधानसभा चुनाव में अपने लिए उम्मीदें जगा दी है।
शुरुआती रुझान में कांग्रेस पहले तीन ही सीटों पर ही भाजपा को टक्कर देते हुए दिखाई दे रही थी, लेकिन पांच सीटों पर सीधे मुकाबले में आकर भाजपा व आप के लिए चुनौती खड़ी की है। कांग्रेस ने 2014 के मुकाबले करीब 8 प्रतिशत ज्यादा मत हासिल किए हैं।
कांग्रेस राजधानी में लगातर तीन बार सत्ता में रही है और लोग उनके कार्यकाल में हुए विकास कार्य आज भी याद करते हैं। पिछले चार वर्ष से केंद्र-आप सरकार की लड़ाई से मतदाता परेशान हो गए हैं और दिल्ली में आप के विधायकों से भी उनकी नाराजगी स्पष्ट हो गई है।
कब किस पार्टी ने किया क्लीन स्वीप
वर्ष पार्टी अंतर
1957 कांग्रेस 5-0
1962 कांग्रेस 5-0
1971 कांगेस 7-0
1977 भालोद 7-0
1984 कांग्रेस 7-0
1999 भाजपा 7-0
2009 कांग्रेस 7-0
2014 भाजपा 7-0